स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के नेता और पूर्व लोकसभा सांसद राजू शेट्टी ने प्याज के दामों को लेकर एक रसीद ट्वीट की है। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, 'कोई महज 13 रुपये से क्या करे? शेट्टी की ये पंक्ति बताती है कि मेहनतकश किसानों को कभी-कभी उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है।
आपको भले ही प्याज अभी महंगा मिल रहा हो, लेकिन किसानों को इसकी कितनी कम कीमत मिल रही है, इसका अंदाजा महाराष्ट्र के सोलापुर में सामने आए एक मामले से लगाया जा सकता है। आप शायद यकीन नहीं करेंगे कि सोलापुर में 1,123 किलो प्याज बेचने वाले किसान के हाथ में सिर्फ 13 रुपये आए। कमीशन एजेंट का कहना है कि खराब फसल की वजह से किसान को इतनी कम कीमत दी गई।
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सोलापुर स्थित कमीशन एजेंट की ओर से दी गई बिक्री रसीद के मुताबिक, किसान बप्पू कावड़े ने 1,123 किलो प्याज बेची जिसके बदले उन्हें सिर्फ 1665.50 रुपये मिले। मजदूरों की मजदूरी, तौल शुल्क और परिवहन पर 1651.98 रुपये खर्च हो गए। इस तरह किसान को सिर्फ 13 रुपये का मुनाफा हुआ। कावड़े के खर्च में प्याज उत्पादन की लागत भी है।
राजू शेट्टी ने उठाया मामला
स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के नेता और पूर्व लोकसभा सांसद राजू शेट्टी ने किसान बप्पू कावड़े को दी गई इस रसीद को ट्वीट करते हुए लिखा, 'कोई महज 13 रुपये से क्या करे? इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। किसान ने प्याज के 24 बैग खेत से कमीशन एजेंट की दुकान में ले जाकर बेचे और इससे महज 13 रुपये की आमदनी हुई। वह कैसे उत्पादन लागत चुकाएगा, जिसमें फसल के लिए मिट्टी तैयार करना, बीज खरीद, खाद और सिंचाई खर्च शामिल है। किसान कावड़े ने 1512 रुपये परिवहन शुल्क के लिए जरूर कमा लिए, वरना यह भी उसे अपनी जेब से देना पड़ता।
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किसान कावड़े से प्याज खरीदने वाले कमीशन एजेंट रुद्रेश पाटिल ने कहा कि फसल की गुणवत्ता बहुत खराब थी, इसलिए मैंने कम कीमत पर प्याज खरीदी। प्याज गीली थी और पिछले कुछ दिनों में बेमौसम बारिश की वजह से खराब हो गई थी। इसी वजह से इतनी कम कीमत मिली।