फेसबुक ने कहा कि देश में लोग उन्हें मिलने वाली गलत जानकारियों या अफवाहों को व्हाट्सएप के +919643000888 नंबर पर चेकप्वाइंट टिपलाइन को भेज सकते हैं। एक बार जब कोई यूजर टिपलाइन को यह सूचना भेज देगा तब प्रोटो अपने प्रमाणन केंद्र पर जानकारी के सही या गलत होने की पुष्टि कर यूजर को सूचित करेगा। इस पुष्टि से यूजर को पता चल जाएगा कि उसे मिला संदेश सही, गलत, भ्रामक या विवादित में से क्या है।
फेक न्यूज को लेकर पहले भी उठाए कदम
पिछले साल हुई मॉब लिंचिंग की घटनाओं के बाद फेसबुक ने अफवाहों और फर्जी खबरों पर रोक लगाने के लिए किसी संदेश को एक बार में केवल पांच लोगों तक फॉरवर्ड करने तक सीमित कर दिया था। इसके अलावा कंपनी ने अखबारों, टीवी और रेडियो में भी लोगों को फर्जी खबरों को लेकर जागरूक किया था।
हर दिन इतने व्हाट्सएप मैसेज होते हैं फारवर्ड
एक सर्वे के अनुसार दुनिया भर में लगभग 65 अरब मैसेज रोज भेजे जाते हैं। वहीं प्रतिदिन लगभग 2 अरब मिनट वीडियो कॉल और वॉयस मैसेज पर खर्च होते हैं।
इसका सबसे बड़ा कारण प्राइवेसी है। कम उम्र के यूजर्स अपने निजी चैट को सार्वजनिक होने से बचाने के लिए सोशल नेटवर्किंग साइट्स को छोड़कर मैसेजिंग एप की ओर रूख कर रहे हैं। इस बात को फेसबुक ने भी स्वीकारा है कि हाल के दिनों में उनके यूजर्स की संख्या में गिरावट देखने को मिल रही है। यही कारण है कि फेसबुक अपने मैसेजिंग एप को और आधुनिक करने में लगा है।
63 फीसदी यूजर सोशल साइट का करते हैं प्रयोग
एक सर्वे के अनुसार दुनिया के लगभग 63.1 फीसदी इंटरनेट यूजर्स सोशल नेटवर्किंग साइट्स और एप का प्रयोग करते हैं। इनकी संख्या साल 2018 में 2.62 अरब था। जिसको 2020 तक 3 अरब से ज्यादा होने का अनुमान जताया गया है।
आधे से ज्यादा यूजर केवल व्हाट्सएप के
सोशल नेटवर्किंग एप व्हॉट्सएप के ही 1.5 अरब से ज्यादा यूजर्स हैं। यह संख्या दुनिया के 180 देशों के लोगों का है। जिसमें भारतीयों की संख्या बहुत ज्यादा है।
- व्हाट्सएप 150 करोड़
- फेसबुक मैसेंजर 130 करोड़
- वीचैट 105 करोड़
- क्यू क्यू मोबाइल 80 करोड़
- स्काइप 30 करोड़
- स्नैपचैट 29 करोड़
- वीबर 26 करोड़
- लाइन 20 करोड़
- टेलीग्राम 20 करोड़
सोशल साइट्स बनाम मैसेजिंग एप
लड़ाई सोशल साइट्स और मैसेजिंग एप के बीच हो रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि दोनों की उपयोगिता बनी रहेगी। न तो मैसेजिंग ऐप सोशल साइट्स की जगह ले पाएंगे न ही सोशल साइट्स मैसेजिंग एप का। लोग सोशल नेटवर्किंग साइट्स की तुलना में मैसेजिंग एप पर ज्यादा एक्टिव रहते हैं क्योंकि इसमें बातचीत का दायरा सीमित होता है।
विगत कुछ समय से फेक न्यूज के फैलने से कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जो सामाजिक दृषिकोण से अस्वीकार्य हैं। इन्हें रोकने के लिए कई स्तरों पर प्रयास भी किया जा रहा है। इसी कड़ी में मैसेजिंग एप व्हाट्सएप ने टिपलाइन की सेवा प्रारंभ की है। जिससे फेक न्यूज पर कुछ हद तक लगाम लगेगी।
चुनाव के समय फेक न्यूज पर लगाम लगाना जरुरी है, क्योंकि इसका दूरगामी असर भविष्य में देखने को मिल सकता है। अगर आप फेक न्यूज से संबंधित कुछ और जानना चाहते हैं तो हमको बताएं, हम वो खबरें भी आपके सामने रखेंगे।
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