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भाजपा के दो बागियों ने थामा कांग्रेस का 'हाथ', एक को मिला टिकट तो दूसरे के साथ ऐसे हो गया 'खेल'

Sat, 06 Apr 2019 05:19 PM IST
Nilesh Kumar निलेश कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद। बगावती तेवर वाले दोनों नेता भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए। शत्रु को टिकट मिला, तो कीर्ति अबतक भंवर में... - फोटो : अमर उजाला
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बिहार में भाजपा के दो बागी सांसद कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। पहले क्रिकेट से राजनीति में आए कीर्ति आजाद और दूसरे बॉलीवुड से राजनीति में आए शत्रुघ्न सिन्हा। सिन्हा ने शनिवार को भाजपा के स्थापना दिवस पर पार्टी छोड़ने का एलान किया और कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस में शामिल होते ही उन्हें कांग्रेस ने उनकी मौजूदा लोकसभा सीट पटना साहिब से टिकट दे दिया, लेकिन डेढ़ महीने पहले कांग्रेस में शामिल हुए कीर्ति आजाद की उम्मीदवारी तय नहीं हो सकी है। और तो और, पार्टी ने कीर्ति को स्टार प्रचारकों की सूची में भी शामिल नहीं किया है, जबकि शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस के स्टार प्रचारक भी बनाए गए हैं।

अब, सवाल यह है कि 

  • क्या कीर्ति आजाद को कांग्रेस ने बिहार से बाहर का रास्ता दिखा दिया है?
  • क्या पिता भागवत झा आजाद की सीट से चुनाव लड़ने झारखंड जाएंगे?
  • क्या उन्हें एक बार फिर दिल्ली बुलाकर किसी सीट से चुनाव लड़ाया जाएगा?
  • क्या शत्रुघ्न सिन्हा के मुकाबले कीर्ति आजाद को कम आंकती है कांग्रेस?

बिहार कांग्रेस प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने बीते बुधवार को स्पष्ट किया था कि कीर्ति आजाद इस बार निश्चित लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि वह अपनी मौजूदा सीट दरभंगा से उम्मीदवार नहीं होंगे। गोहिल ने कहा था कि दरभंगा सीट महागठबंधन में राजद के खाते में चली गई है, इसलिए कीर्ति आजाद या तो अपने पिता भागवत झा आजाद की तरह झारखंड से चुनाव लड़ेंगे या फिर पार्टी उन्हें दिल्ली से चुनावी मैदान में उतार सकती है। 

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(File Photo)
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद के बेटे कीर्ति आजाद मैथिल ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। वह 18 फरवरी को कांग्रेस में शामिल हुए थे। तब उन्होंने कहा था कि वह दरभंगा से ही चुनाव लड़ेंगे। इस बीच महागठबंधन में सीट बंटवारा भी तय हो गया और दरभंगा सीट पर 2014 में मामूली अंतर से हारी राजद इस बार यहां से अपने वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दिकी को उम्मीदवार घोषित कर दिया। बिहार की सभी सीटों पर महागठबंधन के उम्मीदवारों की घोषणा होने के बाद कीर्ति आजाद के वाल्मीकिनगर या अन्य किसी सीट से चुनाव लड़ने की अटकलों पर भी विराम लग गया। 

आप संग गठबंधन से फंसेगी आजाद की गाड़ी!

कीर्ति आजाद साल 1993 से 1998  के बीच दिल्ली से तीन बार विधायक रह चुके हैं। बिहार कांग्रेस प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने बुधवार को संकेत दिया था कि दिल्ली से उन्हें चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है। हालांकि बुधवार तक दिल्ली में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के गठबंधन की तस्वीर साफ नहीं हुई थी। दिल्ली में लोकसभा की केवल सात सीटे हैं। आप संग गठबंधन की स्थिति में कांग्रेस के पास तीन ही सीटें आएंगी और ऐसे में उम्मीदवारी के लिए पार्टी में रस्साकशी का माहौल हो सकता है और कीर्ति के लिए संकट हो सकता है। 
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कीर्ति आजाद - फोटो : PTI
गोड्डा के पहले सांसद थे भागवत झा, पर इस बार सीट झाविमो के खाते में 

कीर्ति के पिता भागवत झा आजाद कद्दावर राजनेता रहे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, कई बार के सांसद भी। आजाद भारत के पहले चुनाव में वह गोड्डा के पहले सांसद बने थे। गोड्डा लोकसभा सीट 1952 में बिहार का हिस्सा थी, बिहार-झारखंड विभाजन के बाद वह झारखंड का हिस्सा है। यहां से मौजूदा सांसद निशिकांत दुबे इस बार भी भाजपा के उम्मीदवार हैं, जबकि महागठबंधन में यह सीट झारखंड विकास मोर्चा के खाते में चली गई है। ऐसे में तय है कि कीर्ति यहां से भी उम्मीदवार नहीं होंगे। 

झारखंड में जो सीटें कांग्रेस के पास हैं, उनमें रांची, खूंटी, लोहरदगा, चाईबासा, हजारीबाग, धनबाद और चतरा शामिल हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या किसी भी सीट से उम्मीदवारी कीर्ति को जीत दिला पाएगी! फिलहाल जो स्थितियां बन रही है, उसमें कीर्ति आजाद का टिकट कंफर्म होता नहीं दिख रहा है। 
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