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UNESCO Report: आस्था आधारित स्कूल लैंगिक समानता को पहुंचा सकते हैं नुकसान, मदरसे में पढ़े लोगों का लड़कियों की उच्च शिक्षा के प्रति रवैया कम अनुकूल

Mon, 27 Jun 2022 07:01 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली

सार

रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया में गैर-राज्य आस्था-आधारित स्कूलों ने लड़कियों की शिक्षा तक पहुंच बढ़ाई है, लेकिन इससे कुछ नुकसान भी हुए हैं। मदरसे में पढ़े लोगों का लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा और कामकाजी माताओं के प्रति रवैया कम अनुकूल है।
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यूनेस्को - फोटो : Twitter
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विस्तार
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मदरसे और एशिया के अन्य धर्म-आधारित स्कूल शिक्षा की पहुंच में बढ़ोतरी की वजह से लैंगिक समानता पर पड़ने वाले कुछ सकारात्मक प्रभावों नुकसान पहुंचा सकते हैं। समाज में पितृसत्तात्मक मानदंडों और दृष्टिकोणों को मजबूत करने वाले प्रभाव डाल सकते हैं। यूनेस्को द्वारा “पीछे रह गए लोगों पर विचार-विमर्श को बढ़ावा देना” विषय पर प्रकाशित वैश्विक शिक्षा निगरानी रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया में गैर-राज्य आस्था-आधारित स्कूलों ने लड़कियों की शिक्षा तक पहुंच बढ़ाई है, लेकिन इससे कुछ नुकसान भी हुए हैं। मदरसे में पढ़े लोगों का लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा और कामकाजी माताओं के प्रति रवैया कम अनुकूल है। वे पत्नियों की मुख्य जिम्मेदारी बच्चों का पालन-पोषण मानते हैं। वे मानते हैं कि कितने बच्चे होने चाहिए यह ईश्वर की मर्जी पर निर्भर है। इसमें बड़े परिवारों के लिए उनकी प्राथमिकता का संकेत मिलता है। रिपोर्ट के मुताबिक कई दशक पहले एशिया के कई मुस्लिम-बहुल देशों में शिक्षा में लैंगिक असमानता ज्यादा थी।

शिक्षक प्रशिक्षित नहीं
रिपोर्ट के मुताबिक शिक्षकों के पास लैंगिक मुद्दों पर काम करने के लिए प्रशिक्षण की कमी हो सकती है। वे नकारात्मक मॉडल के रूप में कार्य कर सकते हैं। मिसाल के तौर पर प्रजनन क्षमता के प्रति छात्रों के दृष्टिकोण को प्रभावित करना। हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आस्था-आधारित स्कूलों के ऐसे संभावित नकारात्मक प्रभावों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश नहीं किया जाना चाहिए।

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