बहुराष्ट्रीय कंपनी अर्न्स्ट एंड यंग (ई एंड वाई) की 26 साल की एक युवा चार्टर्ड एकाउंटेंड की कथित रूप से काम के दबाव के कारण हुई मौत के बाद बुधवार को कंपनी ने एक बयान जारी कर शोक व्यक्त किया और कहा कि यह हम सभी के लिए एक अपूर्णीय क्षति है। कंपनी ने कहा कि वह एना सेबेस्टियन पेरिइल की मौत से बहुत दुखी है। कंपनी ने इस बात पर जोर दिया कि वह देशभर में अपनी सदस्य कंपनियों में सुधार करने और एक स्वस्थ कार्यस्थल प्रदान करने के तरीके खोजना जारी रखेगी।
यह घटनाक्रम एना की मां अनीता ऑगस्टीन द्वारा लिखा गया एक हृदयविदारक पत्र वायरल होने के बाद आया। ई एंड वाई इंडिया के चेयरमैन राजीव मेमानी को संबोधित पत्र में, ऑगस्टीन ने अपनी बेटी के खराब स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक काम का बोझ और ई एंड वाई के चार महीने के उदासीन रवैये को जिम्मेदार ठहराया था।
कंपनी ने शोक संतप्त परिवार के प्रति जताई गहरी संवेदना
कंपनी ने के बयान में कहा गया कि जुलाई 2024 में एना सेबेस्टियन के दुखद और असामयिक निधन से हमें गहरा दुख हुआ है। शोक संतप्त परिवार के प्रति हमारी गहरी संवेदना है। कहा, 'हालांकि कोई भी उपाय परिवार को हुए नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता है, हमने संकट के ऐसे समय में हमेशा की तरह सभी सहायता प्रदान की है और आगे भी करते रहेंगे।' ई एंड वाई ने कहा कि कंपनी परिवार के पत्राचार को अत्यंत गंभीरता और विनम्रता के साथ ले रही है।
कंपनी ने आगे कहा, 'हम सभी कर्मचारियों की भलाई को सबसे अधिक महत्व देते हैं और भारत में ई एंड वाई सदस्य फर्मों में अपने 100000 लोगों के लिए एक स्वस्थ कार्यस्थल में और सुधार प्रदान करने के तरीके ढूंढना जारी रखेंगे।'
नवंबर 2023 में एना ने पास की थी सीए की परीक्षा
केरल की एना की मां अनिता ने पत्र में लिखा, एना ने नवंबर 2023 में सीए की परीक्षा पास की, मार्च-2024 में ई एंड वाई में काम करना शुरू किया। वह ऊर्जा और जीवन से भरपूर थी। इतनी प्रतिष्ठित कंपनी में काम करने से खुश थी। लेकिन सिर्फ चार माह बाद मेरी दुनिया उजड़ गई, जब एना की मौत की खबर मिली। सबसे दुखद यह कि उसके अंतिम संस्कार में कंपनी से कोई नहीं पहुंचा।
कन्वोकेशन के लिए भी छुट्टी नहीं
अनिता ने लिखा कि वह और उनके पति छह जुलाई को एना के सीए कन्वोकेशन में हिस्सा लेने पुणे गए। वहां एना ने छाती में दर्द की शिकायत की, तो उसे डॉक्टर के पास लेकर गए। डॉक्टर ने बताया कि सिर्फ कम सोने व बेहद कम खाने के कारण उसे समस्या हो रही है। उस दिन भी एना आराम करने के बदले यह कहकर ऑफिस गई कि बहुत काम बचा हुआ है। अगले दिन कन्वोकेशन में भी काम के दबाव के कारण देर से पहुंची।
काम में झोंके रहने को उचित नहीं ठहरा सकते
अनिता ने लिखा, नए कर्मियों को दिन-रात, यहां तक कि रविवार को भी काम में झोंके रहने को कोई उचित नहीं ठहरा सकता। मेरी बेटी बेहद विनम्र थी, उसने कभी अपने मैनेजरों की शिकायत नहीं की, लेकिन मैं चुप नहीं रह सकती। यह पूरा मामला किसी एक व्यक्ति नहीं पूरी प्रणाली का दोष है। अवास्तविक उम्मीदें और उन्हें पूरा करने के लिए जीवन से भरपूर हमारे युवाओं की जान से खेलना हमेशा नहीं चल सकता।