ये बैठक क्यों हो रही है?
ये बैठक सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश की वजह से हो रही है। कोर्ट ने पिछले महीने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात करने को कहा था। कोर्ट ने कहा था इस बैठक मे दोनों नेता SYL मुद्दे के सौहार्दपूर्ण समाधान का रास्ता खोजें। दरअसल, हरियाणा ने कोर्ट को बताया था कि पंजाब के मुख्यमंत्री हरियाणा के साथ बैठक को लेकर अनिच्छुक हैं। कोर्ट के कहने के बाद दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की यह बैठक हो रही है।
बैठक के बाद क्या होगा?
दोनों राज्यों को 15 अक्टूबर को कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना है। इस बैठक के बाद दोनों राज्य अपने जवाब तैयार करेंगे। जो उन्हें कोर्ट में दाखिल करना होगा। दोनों राज्यों द्वारा दिए जाने वाले जवाब से ही तय होगा कि यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
भगवंत मान और मनोहर लाल खट्टर।
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SYL को लेकर विवाद क्या है?
एक नवंबर 1966 को पंजाब से अलग होकर हरियाणा राज्य की स्थापना हुई। उसी दिन से इस विवाद की शुरुआत होती है। नए राज्य के गठन के साथ पंजाब को नदियों का पानी साझा करने की जरूरत हुई। लेकिन, पंजाब ने रावी और ब्यास नदियों का पानी हरियाणा से बांटने के विरोध किया।
हरियाणा के गठन से एक दशक पहले रावी और ब्यास में बहने वाले पानी का आकलन 15.85 मिलियन एकड़ फीट (MAF) किया गया। केंद्र सरकार ने 1955 में राजस्थान, अविभाजित पंजाब और जम्मू कश्मीर के बीच एक बैठक आयोजित कराई। ये नदियां इन्हीं तीनों राज्यों से गुजरती थीं। तब राजस्थान को आठ MAF, अविभाजित पंजाब को 7.20 MAF और जम्मू कश्मीर को 0.65 MAF पानी आवंटित किया गया।
हरियाणा के गठन के बाद मुताबिक पंजाब के हिस्से के 7.2 MAF पानी में से 3.5 MAF हरियाणा को आवंटित किए गए। 1981 में हुए पुनर्मूल्यांकन के बाद पानी का आंकलन बढ़ाकर 17.17 MAF कर दिया गया। इसमें से पंजाब को 4.22 MAF, हरियाणा को 3.5 MAF और राजस्थान को 8.6 MAF पानी आवंटित हुआ। हालांकि, ये बंटवारा कभी लागू नहीं हो सका।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर।
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