फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

एक्सप्लेनर: पूर्वोत्तर के कई इलाकों से क्यों हटा AFSPA? जानिए इस विवादित कानून के बारे में सबकुछ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जयदेव सिंह Updated Fri, 01 Apr 2022 11:17 PM IST

सार

AFSPA यानी सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून। इसका मूल स्वरूप अगस्त 1942 में अंग्रेजों ने लागू किया था। तब का कानून भारत छोड़ो आंदोलन को कुचलने के लिए सैन्य बलों को विशेष अधिकार देता था।
विज्ञापन
विज्ञापन
कई जिलों से हटाया गया AFSPA - फोटो : अमर उजाला

केंद्र सरकार ने उत्तर पूर्वी राज्यों असम, नगालैंड व मणिपुर से सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (AFSPA) का क्षेत्र सीमित करने का फैसला किया है। दायरा सीमित किए जाने के बाद यह कानून अब इन राज्यों के कुछ खास इलाकों में ही लागू रहेगा। उत्तर-पूर्व के राज्यों से इस कानून को हटाने के लिए लंबे समय से मांग हो रही है। बीते सालों में इस कानून का दायरा लगातार कम हो रहा है।  

AFSPA कानून क्या है? ये कितने राज्यों में अभी भी लागू है?  AFSPA के जरिए सैन्य बलों को क्या विशेषाधिकार दिए गए?  इस कानून का दायरा कम करने का क्या असर होगा? कानून का विरोध क्यों होता है? दशकों से लागू कानून को अभी ही क्यों हटाया जा रहा है? आइये समझते हैं...

AFSPA कानून क्या है?

AFSPA यानी सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून। इसका मूल स्वरूप अगस्त 1942 में अंग्रेजों ने लागू किया था। उस वक्त भारत छोड़ो आंदोलन  चल रहा था। आंदोलन को कुचलने के लिए इस कानून में सैन्य बलों को विशेष अधिकार दिए गए थे।

  • आजाद भारत की बात करें तो मई 1958 में नगालैंड में जारी विद्रोह को दबाने के लिए एक अध्यादेश के जरिए AFSPA लाया गया। 11 सितंबर 1958 को संसद से पास होने के बाद AFSPA कानून लागू हुआ।
  • जनवरी 1967 में पूरे मिजोरम को भी AFSPA के दायरे में लाया गया। 
  • नवंबर 1970 में AFSPA के दायरे को और बढ़ा दिया गया। अब पूरे त्रिपुरा में भी इसे लागू कर दिया गया। 
  • सितंबर 1980 में इस कानून को मणिपुर में भी लागू कर दिया गया। 
  • फरवरी 1987 में इसका दायरा बढ़ाकर अरुणाचल प्रदेश को भी AFSPA के दायरे में लाया गया। 
  • नवंबर 1990 में असम में भी जारी उल्फा विद्रोह के चलते यहां भी AFSPA लागू हुआ। इसके साथ ही मेघालय में भी इसे लागू कर दिया गया।   
विज्ञापन

कई जिलों से हटाया गया AFSPA - फोटो : अमर उजाला

केंद्र सरकार ने उत्तर पूर्वी राज्यों असम, नगालैंड व मणिपुर से सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (AFSPA) का क्षेत्र सीमित करने का फैसला किया है। दायरा सीमित किए जाने के बाद यह कानून अब इन राज्यों के कुछ खास इलाकों में ही लागू रहेगा। उत्तर-पूर्व के राज्यों से इस कानून को हटाने के लिए लंबे समय से मांग हो रही है। बीते सालों में इस कानून का दायरा लगातार कम हो रहा है।  

AFSPA कानून क्या है? ये कितने राज्यों में अभी भी लागू है?  AFSPA के जरिए सैन्य बलों को क्या विशेषाधिकार दिए गए?  इस कानून का दायरा कम करने का क्या असर होगा? कानून का विरोध क्यों होता है? दशकों से लागू कानून को अभी ही क्यों हटाया जा रहा है? आइये समझते हैं...

AFSPA कानून क्या है?

AFSPA यानी सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून। इसका मूल स्वरूप अगस्त 1942 में अंग्रेजों ने लागू किया था। उस वक्त भारत छोड़ो आंदोलन  चल रहा था। आंदोलन को कुचलने के लिए इस कानून में सैन्य बलों को विशेष अधिकार दिए गए थे।

  • आजाद भारत की बात करें तो मई 1958 में नगालैंड में जारी विद्रोह को दबाने के लिए एक अध्यादेश के जरिए AFSPA लाया गया। 11 सितंबर 1958 को संसद से पास होने के बाद AFSPA कानून लागू हुआ।
  • जनवरी 1967 में पूरे मिजोरम को भी AFSPA के दायरे में लाया गया। 
  • नवंबर 1970 में AFSPA के दायरे को और बढ़ा दिया गया। अब पूरे त्रिपुरा में भी इसे लागू कर दिया गया। 
  • सितंबर 1980 में इस कानून को मणिपुर में भी लागू कर दिया गया। 
  • फरवरी 1987 में इसका दायरा बढ़ाकर अरुणाचल प्रदेश को भी AFSPA के दायरे में लाया गया। 
  • नवंबर 1990 में असम में भी जारी उल्फा विद्रोह के चलते यहां भी AFSPA लागू हुआ। इसके साथ ही मेघालय में भी इसे लागू कर दिया गया।   

AFSPA - फोटो : अमर उजाला

क्या इन सभी राज्यों में अब तक AFSPA लागू था?

नहीं, ऐसा नहीं है। इस कानून के दुरुपयोग के खिलाफ विरोध शुरू हो गया था। नवंबर 2000 में मणिपुर की एक्टिविस्ट इरोम शर्मिला भूख हड़ताल पर बैठ गईं। शर्मिला इस कानून को हटाने की मांग कर रहीं थीं। 

  • जुलाई 2004 में इस कानून के खिलाफ पूरे मणिपुर में विरोध प्रदर्शन हुए। 
  • जून 2005 में बीपी जीवन रेड्डी कमेटी ने इस कानून को हटाए जाने की सिफारिश की। 
  • मई 2015 में त्रिपुरा पहला राज्य बना जहां से AFSPA को हटाया गया। 
  • अप्रैल 2018 में मेघालय से AFSPA को हटाया गया। 
  • मार्च 2022 में केंद्र ने असम, मणिपुर और नगालैंड के अधिकांश इलाकों से AFSPA को हटाया। 


असम, मणिपुर और नगालैंड के किन इलाकों में अभी भी AFSPA लागू?
असम के 33 कुल जिलों में से 23 जिलों से AFSPA को हटा लिया गया है। नौ जिलों में ये अभी भी लागू है। वहीं, कछार जिले में इस कानून को आंशिक रूप से लागू रखा गया है। नगालैंड के 11 जिलों में से तीन जिलों से पूरी तरह और कोहिमा  समेत चार जिलों से आंशिक रूप से इस कानून को हटा लिया गया है। इसी तरह मणिपुर के कुल 16 जिलों में से छह जिले ऐसे हैं जहां से AFSPA को पूरी तरह हटा लिया गया है। बाकी जिलों में अभी भी ये कानून लागू रहेगा।

AFSPA - फोटो : अमर उजाला

AFSPA के जरिए सैन्य बलों को क्या विशेषाधिकार दिए गए? 

ये कानून सशस्त्र बलों को अशांत क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए विशेष अधिकार देता है। इसका उल्लंघन करने वाले पर बल प्रयोग और उस पर गोली चलाने तक की भी अनुमति होती है। इसमें सैन्य बलों को बिना वारंट के किसी को भी संदेह के आधार पर गिरफ्तार करने, किसी परिसर में प्रवेश करने और उसकी तलाशी लेने का भी अधिकार है। यहां तक कि केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना सुरक्षा बलों के खिलाफ कोई मुकदमा या कानूनी कार्रवाई भी नहीं हो सकती है।

इस कानून का दायरा कम करने का क्या असर होगा?

उत्तर-पूर्व के लोग बीते करीब 60 साल से इस कानून के साये में जी रहे हैं। इसकी वजह से यहां के लोग देश के बारी राज्यों से अलग-थलग महसूस करते हैं। केंद्र के इस कदम के बाद इस इलाके का असैन्यीकरण करने में मदद मिलेगी। साथ ही यहां के लोगों को कई मामलों में राहत मिलेगी। केंद्र सरकार ने AFSPA को बीते कुछ वर्षों में कई इलाकों से हटाया है। इस बार इसमें मणिपुर और नगालैंड के जिलों को शामिल करने को बड़ा कदम माना जा रहा है। सुरक्षा बल पहले इन इलाकों से AFSPA को हटाने के खिलाफ रहे हैं।  बीते दिसंबर में हुई आम लोगों की हत्या के बाद नगालैंड में इस कानून को लेकर काफी गुस्सा था। सरकार के इस फैसले से ये गुस्सा कम होने की भी उम्मीद है। 

दशकों से लागू ये कानून अभी क्यों हटाया जा रहा है?

बीते दो दशकों में पूर्वोत्तर के कई इलाकों में उग्रवाद की घटनाएं कम हुई हैं। इनमें से कई उग्रवादी समूहों की भारत सरकार से बातचीत चल रही है। मौजूदा सरकार में बातचीत की ये प्रक्रिया भी तेज हुई है। नगालैंड में नगा नेशनल पॉलिटिकल ग्रुप्स (NNPGs), NSCN(I-M) जैसे समूहों के सरकार के साथ समझौता होने की कगार पर है। इसी तरह मणिपुर में भी 2012 के बाद से उग्रवाद में भारी कमी आई है।  

सरकार के इस फैसले पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इस फैसले से दशकों से उपेक्षित महसूस कर रहे उत्तर पूर्वी राज्यों में शांति व समृद्धि का नया युग शुरू होगा। गृह मंत्री ने कहा कि अफस्पा के दायरे में आने वाले क्षेत्रों में कमी इन राज्यों में सुरक्षा की स्थिति में सुधार, तेजी से विकास व तमाम शांति समझौतों के कारण हो सकी है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next