ओमिक्रॉन के मामलों को लेकर अगले दो से तीन हफ्ते बेहद महत्वपूर्ण हैं। विशेषज्ञों का आकलन है कि अगर कोविड के मामले अलग-अलग राज्यों में और जिलों में आज के ट्रेंड के हिसाब से रहे तो फरवरी के दूसरे सप्ताह से मामलों में और कमी आने लगेगी। आईसीएमआर और इम्पीरियल कॉलेज के गणितीय आकलन के मुताबिक ऐसी दशा में अनुमान है कि मार्च के दूसरे सप्ताह से महामारी एंडेमिक की श्रेणी में पहुंच सकती है।
इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च के मुख्य महामारी विशेषज्ञ डॉक्टर समीरन पांडा कहते हैं कि तीन-तीन सप्ताह के आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है। सभी राज्यों से अलग-अलग आंकड़े आ रहे हैं। लेकिन उनमें वह तेजी नहीं है जो बीच मे बढ़ी थी। डॉक्टर पांडा के मुताबिक यह कहा जा सकता है कि अलग-अलग राज्यों में कोविड का पीक गुजर चुका है। कुछ राज्यों में ज़रूर मामले अभी ज्यादा आ रहे हैं, लेकिन उनमें भी वह तेजी नहीं है। आईसीएमआर के विशेषज्ञों के मुताबिक पूरे देश में एक साथ मामले कम नहीं हो सकते हैं। इसीलिए सभी राज्य अपने-अपने जिलों और शहरों में वहां के मामलों के अनुसार रियायतें भी बरत रहे हैं और रोजाना के कामकाज को भी सामान्य कर रहे हैं। उनके मुताबिक देश के सभी राज्य आईसीएमआर और इंपीरियल कॉलेज के क्रमिक सेमुलेटर मॉडल पर काम कर रहे हैं।
12 मार्च के बाद अंतिम चरण में होगी महामारी
डॉक्टर समीरन पांडा कहते हैं कि इंपीरियल कॉलेज और आईसीएमआर के गणितीय मॉडल के आकलन के अनुसार इस बात की पुष्टि हो रही है कि फरवरी के दूसरे सप्ताह से देश में ओमिक्रॉन के मामले कम होने शुरू हो जाएंगे। और अगर तय मॉडल के अनुसार ही मामले लगातार कम होते रहे तो अनुमान है कि 12 मार्च के बाद यह महामारी अपने अंतिम चरण में होगी। जो पेंडेमिक के बाद एंडेमिक की श्रेणी में पहुंच सकती है। डॉक्टर से पांडा का कहना है कि यह एक आकलन है, जो इस बीमारी की तीव्रता और उसके कम होने वाले केसेज का अनुमान लगाती है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के नेशनल कोविड टास्क फोर्स टीम के डॉक्टर एनके अरोड़ा कहते हैं कि अभी भी देश में कोविड संक्रमित मरीजों की संख्या बहुत कम नहीं हुई है। इसलिए यह कहना कि सब कुछ बहुत जल्द सामान्य हो जाएगा, थोड़ा जल्दी होगा। वह कहते हैं कि अगले दो से चार हफ्ते बेहद महत्वपूर्ण हैं। उनका कहना है कि जब तक मामले एक लाख से कम नहीं हो जाते तब तक इस बात को मजबूती के साथ नहीं कहा जा सकता है कि हालात पूरी तरह से सामान्य हो चुके हैं। वह कहते हैं कि इसके अलावा इस पर भी नजर रखी जा रही है कि आने वाले दिनों में ऐसा न हो कि वायरस का नया म्यूटेंट बहुत एग्रेसिव हो जाए। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय लगातार इस पर नजर बनाए हुए है। इसके अलावा संबंधित स्वास्थ्य एजेंसियों समेत राज्यों को भी इस पर लगातार अपडेट लिए और दिए जा रहे हैं।