समस्याएं
हाइड्रोजन फ्यूल की संभावना बहुत ज्यादा है। एक लीटर हाइड्रोजन, एक लीटर डीजल की तुलना में तीन गुना ज्यादा एनर्जी उत्पन्न करता है, लिहाजा इस दृष्टि से यह बहुत उपयोगी है। लेकिन एक लीटर हाइड्रोजन को रखने के लिए 11 हजार लीटर के टैंक की आवश्यकता होती है, क्योंकि यह बहुत हल्का होता है और इसका आयतन बहुत ज्यादा है। इसके लिए इसे तरल रूप में बदलना पड़ता है। लेकिन हाइड्रोजन को तरल रूप में बदलने की प्रक्रिया भी बहुत महंगी है, लिहाजा यह अभी भी बहुत व्यावहारिक नहीं हो पा रही है। वैज्ञानिक हाइड्रोजन के सस्ते ट्रांसपोर्टेशन की प्रक्रिया विकसित करने में जुटे हुए हैं।
रिलायंस करेगा निवेश
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अध्यक्ष मुकेश अंबानी ने कहा है कि भारत हाइड्रोजन की कीमतें कम करने के लिए लगातार काम कर रहा है। भारत का लक्ष्य है कि ये कीमतें एक डॉलर प्रति किलोग्राम तक आ जाएं। ऐसा करने में छह साल का समय लग सकता है, लेकिन ऐसा होते ही हाइड्रोजन के लिए नये अवसर खुल सकते हैं। रिलायंस ने ऐसा करने के लिए एक यूरोपीय कंपनी से करार भी किया है जिसमें उक्त कंपनी रिलायंस को तकनीकी मदद उपलब्ध कराएगी।
जहां तक वाहनों में हाइड्रोजन के उपयोग की बात है, इसके लिए हाइड्रोजन को पेट्रोल-डीजल या सीएनजी की तरह बहुत सुरक्षित स्तर पर लाना होगा। कुछ वाहन पायलट प्रोजेक्ट पर चलाए जा रहे हैं, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर इसे सफल बनाने के लिए अभी बहुत रिसर्च और निवेश की आवश्यकता है। लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि ये तकनीकी बाधाएं जल्द ही दूर हो जायेंगी और इसके बाद ऊर्जा का एक बड़ा संकट सदैव के लिए समाप्त हो जाएगा।