ये होता है डबल मास्किंग?
सफदरजंग अस्पताल के प्रोफेसर, निदेशक कम्युनिटी मेडिसिन डॉ. जुगल किशोर ने अमर उजाला को बताया कि चेहरे पर एक की बजाए दो मास्क पहनने को डबल मास्किंग कहा जाता है। अगर कोई व्यक्ति एक के ऊपर एक दो कपड़े के ही मास्क पहन ले या फिर कोई दूसरी तरह का मास्क पहने तो वह ज्यादा प्रभावी नहीं होगा। डबल मास्क पहनने का भी एक खास तरीका होता है। इसमे पहले सर्जिकल मास्क और फिर कपड़े का मास्क पहना जाता है। लेकिन सर्जिकल मास्क नहीं है तो दो कपड़े के मास्क भी पहने जा सकते हैं। ये सिंगल मास्क से ज्यादा प्रभावी होंगे।
इस तरह से पहने डबल मास्क
डॉ. किशोर बताते हैं कि पहले सर्जिकल मास्क लें और इसके इलास्टिक की दोनों छोरों पर गांठ बांधे लें। नाक और चेहरे पर मास्क को अच्छे से फिट करें। इसके बाद सामान्य कपड़े का बना हुआ मास्क लगाएं। दोनों मास्क चेहरे को अच्छी तरह से कवर कर लेंगे। इस दौरान ध्यान रखें कि चेहरे और मास्क के किनारे के बीच गैप न हो। एक साथ दो सर्जिकल मास्क या फिर एन-95 मास्क न पहनें।
इस दौरान जरूर पहनें डबल मास्क
विशेषज्ञों का कहना है कि इन दिनों जो लोग बस, मेट्रो, ट्रेन, अस्पताल या सार्वजनिक भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जा रहे हैं उन्हें डबल मास्क का प्रयोग जरूर करना चाहिए। अगर किसी के घर जा रहे हैं तो भी डबल मास्क पहनें। इससे खुद के साथ साथ दूसरे की भी सुरक्षा हो सकेगी। अगर अपने घर में रह रहे हैं तो एक मास्क पहनकर भी काम चलाया जा सकता है।
इस तरह का खरीदें मास्क
डॉ. किशोर ने बताया कि सर्जिकल मास्क के साथ-साथ कपड़े के दो से तीन लेयर वाले मास्क भी ज्यादा असरदार होते हैं। कपड़े का मास्क खरीदते या घर में भी बनाते समय ध्यान रहे कि वह दो से तीन लेयर वाला हो। कपड़े के सिंगल लेयर मास्क खरीदने या पहनने से बचें। जहां तक संभव हो एन95 मास्क या नोज वायर मास्क उपयोग में ले। नोज वायर मास्क में एक ओर वायरिंग जैसा स्ट्रक्चर होता है। ये असल में नाक के ऊपर आसानी से फिट हो इसलिए इसे बनाया गया है। नोज वायर को ऊपर की ओर पहनने से चश्मे में भाप भी नहीं जमती है।
ऐसे मास्क न करें इस्तेमाल
डॉक्टर किशोर कहना है कि बहुत ही ज्यादा ढीले या ज्यादा टाइट मास्क पहनने से बचें। वहीं जिसमें सांस लेने के लिए अगल से वॉल्व बना हो उसे भी न लें। प्लास्टिक व लेदर के मास्क का प्रयोग नहीं करें। इससे सांस लेने में बहुत परेशानी होती है। सर्जिकल मास्क का एक बार प्रयोग करने के बाद दोबारा प्रयोग करने से बचें। जहां तक एन95 मास्क की बात है तो उसे धोकर या धूप में एक या दो दिन रखने के बाद तीन से चार बार प्रयोग किया जा सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि छोटे बच्चे, बुजुर्गों के अलावा दमा और सांस फूलने की तकलीफ वाले मरीज डबल मास्क लगाने से बचें। जहां तक संभव हो वे अपने घरों में ही रहें। अगर कोई डबल मास्क पहननता है तो पहनने के बाद कुछ कदम चलकर देखें। डबल मास्क लगाने के बाद सांस लेने में परेशानी हो रही है तो फिर एक ही मास्क पहनें। जहां तक हो एन95 या सर्जिकल मास्क का ज्यादा प्रयोग करें।