अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा के बाद दस्तक दे रहे कापा वैरिएंट को लेकर लोगों में दहशत फैल रही है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कापा वैरिएंट नया स्वरूप नहीं है। पिछले साल भी इसने दस्तक दी थी। अभी भी पूरी दुनिया में सबसे खतरनाक डेल्टा वैरिएंट ही माना गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक अभी हमें सबसे ज्यादा डेल्टा वैरिएंट से ही बचना होगा।
पूरी दुनिया में तबाही मचा रहे डेल्टा वैरिएंट के बीच में एक नया नाम कापा वैरिएंट का भी आया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की नेशनल कोविड टास्क फोर्स के सदस्य डॉक्टर एनके अरोड़ा कहते हैं कि अभी तक के शुरुआती आकलन में कापा वैरिएंट का कोई भी खतरनाक या जानलेवा लक्षण सामने नहीं आया है। उनके मुताबिक कोरोना के पहली लहर के बीच में भी कापा वैरिएंट ने दस्तक दी थी। जिनोम सीक्वेंसिंग में कापा वैरिएंट की पुष्टि हुई थी। उसके बाद अचानक आए डेल्टा वैरिएंट ने सभी मौजूदा स्वरूपों को न सिर्फ पीछे छोड़ा बल्कि उनकी मारक और संक्रमण फैलाने की क्षमता को भी कम कर दिया।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक कापा वैरिएंट से ज्यादा खतरनाक लेम्ब्डा वैरिएंट माना गया है हालांकि इन दोनों वैरिएंट की तुलना अगर डेल्टा वैरिएंट से करते हैं तो यह दोनों की तुलना में खतरनाक नहीं है। क्योंकि कोरोना वायरस के बारे में अभी इस बात का अंदाजा नहीं हो पाया है कि इसके कितने स्वरूप अभी और बदलेंगे इसलिए हर वैरिएंट को खतरनाक की दृष्टि से ही देखा जा रहा है। लेकिन शोध के बाद आए उसके नतीजे उसकी ग्रैविटी के बारे में सब कुछ बता देते हैं उसी के आधार पर वायरस के खतरनाक होने और न होने का आकलन किया जाता है।
आईसीएमआर और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना की देश में आई पहली लहर के दौरान अल्फा, बीटा और गामा वैरिएंट सामने आ रहे थे। उसी दौरान जिनोम सीक्वेंसिंग के बाद कापा की पुष्टि हुई थी। वैज्ञानिकों का कहना है पहली लहर में लोगों को संक्रमण और मौत की दर कापा वैरिएंट की तुलना में अल्फा, बीटा और गामा से बहुत ज्यादा हुई।
कापा से ज्यादा खतरनाक है लेम्ब्डा लेकिन डेल्टा के मुकाबले नहीं
वैज्ञानिकों का कहना है डेल्टा, कापा और लेम्ब्डा की तुलना में सबसे ज्यादा खतरनाक डेल्टा वैरिएंट है। दक्षिण अमेरिकी देशों से होकर दुनिया के कई मुल्कों में पहुंचे लेम्ब्डा स्वरूप के संक्रमण की दर और जानलेवा होने का डर जरूर कापा की तुलना में ज्यादा है लेकिन डेल्टा वैरिएंट के मुकाबले बहुत कम है। विशेषज्ञों का कहना है अपने देश पर अभी तक लेम्ब्डा वैरिएंट की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन इस पर नजर बनाए रखने की बहुत आवश्यकता है।