कांग्रेस से निष्काषित संजय निरुपम करीब दो दशक बाद फिर से अपनी पहली पार्टी शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। शिवसेना की अध्यक्ष फिलहाल एकनाथ शिंदे कर रहे हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के पदाधिकारियों के साथ एक बैठक के बाद इसका एलान किया है। इस बैठक में निरुपम भी मौजूद थे।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बुधवार को शिवसेना के पदाधिकारियों की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद संवाददाताओं से कहा, 'संजय निरुपम जल्द ही शिवसेना में शामिल होंगे। बैठक के दौरान निरूपम भी मौजूद थे, जिसे शिंदे ने शिष्टाचार भेंट बताया। इस बीच, शिंदे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंबई में दो रैलियां करने की संभावना है। मुंबई में 20 मई को मतदान होना है।
कहा जा रहा है कि निरुपम कांग्रेस के टिकट पर मुंबई उत्तर पश्चिम लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन एमवीए सहयोगियों के बीच सीट-बंटवारे के समझौते के तहत यह सीट शिवसेना (यूबीटी) की झोली में चली गई। मूल रूप से बिहार के रहने वाले निरुपम ने 1990 के दशक में पत्रकारिता के जरिए राजनीति में प्रवेश किया था। वह अविभाजित शिवसेना के हिंदी मुखपत्र 'दोपहर का सामना' के संपादक बने। उनके काम से प्रभावित होकर शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने उन्हें 1996 में राज्यसभा भेजा। निरुपम उस समय शिवसेना के फायरब्रांड चेहरे के रूप में उभरे। उस समय शिवसेना मुंबई के उत्तर भारतीय मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी। हालांकि, उन्हें तब झटका लगा जब 2005 में उन्हें राज्यसभा सदस्य का पद छोड़ने के लिए कहा गया।
बाद में मतभेद सामने आए, जिसके बाद 2005 में निरुपम के शिवसेना छोड़ दी और कांग्रेस में शामिल हो गए। उन्होंने 2009 में राम नाइक को हराकर कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में मुंबई उत्तर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीता। हालांकि, 2014 में, उन्हें उसी निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के गोपाल शेट्टी के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा।
निरुपम ने 2017 के मुंबई नगर निकाय चुनावों में पार्टी की हार के बाद मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के बाद, निरुपम ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में वैचारिक रूप से असंगत कांग्रेस और शिवसेना (अविभाजित) के त्रिपक्षीय महा विकास अघाड़ी के गठन का विरोध किया था। धीरे-धीरे कांग्रेस नेतृत्व से उनकी असहमति बढ़ती गई, परिणामस्वरूप पिछले महीने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।