एक्साइज विभाग ने निर्णय लिया है कि वह भारत में बनी विदेशी शराब (आईएमएफएल) को सब्सिडी दरों पर अर्धसैनिक बलों को मुहैया करवाएगा। इस सूची में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल को भी शामिल किया गया है। वर्तमान में आईएमएफएल की सुविधा केवल भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के जवानों को मिलती है। आईएमएफएल सेना के जवानों से सामान्य शुल्क की बजाए केवल 50 प्रतिशत सेल्स टैक्स वसूलती है। जिसमें 21 प्रति लीटर शुद्ध शराब पर वसूली जाने वाली 21 रुपए की एक्साइज ड्यूटी की छूट भी शामिल है।
सामान्य बिक्री के दौरान प्रति लीटर शराब पर 33 से 66 रुपए की एक्साइज ड्यूटी लगती है। जहां एक तरफ बार होटल्स को विदेशी शराब बनाने का लाइसेंस लेने के लिए सालाना एक लाख रुपए जमा करवाने पड़ते हैं वहीं दूसरी ओर सेना की यूनिट को इसके लिए सालाना केवल एक हजार रुपए देने पड़ते हैं। फैसले के अनुसार केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस और सशस्त्र सीमा बल अब विदेशी शराब की अपनी यूनिट स्थापित कर सकेंगे।
सेना के पास इस समय कोच्ची में बॉन्डेड वेयरहाउस लाइसेंस (बीडब्ल्यू-1) है जिसके जरिए वह केंद्रीय स्टोर डिपार्टमेंट का संचालन करता है। यहीं से सेना आईएमएफएल को राज्य की विभिन्न कैंटीन में भेजता है। नए निर्णय के बाद से
अर्धसैनिक बलों के पास भी इस तरह की एक यूनिट होगी। जहां से हर फोर्स को आवश्यक मात्रा में अपनी विभिन्न यूनिट्स को भेज सकता है। कर विभाग ने पहले ही विदेशी शराब के नियमों में संशोधन कर दिया है। जो इस समय कानून विभाग के दायरे में है।
बहुत से अर्धसैनिक बलों ने राज्य सरकारों के सामने मांग रखी थी उन्हें सब्सिडी दरों पर विदेशी शराब मुहैया करवाई जाए लेकिन सरकार ने केवल बीएसएफ और सीआरपीएफ को राज्य की राजधानी में केवल एक यूनिट खोलने की इजाजत दी थी। जैसे ही एक बार नई मंजूरी को कानून के तौर पर अधिसूचित किया जाएगा सभी यूनिट इस सेवा का लाभ उठा पाएंगे।