आरोपियों ने वारजे मालवाड़ी इलाके में अरविंद बरतक्के अस्पताल में जनवरी और दिसंबर 2021 के बीच मरीजों का कथित रूप से फर्जी रिकॉर्ड बनाया, ताकि ऐसा लगे कि सुविधा में परीक्षण किट, सैनिटाइजर और दवाओं जैसी सामग्रियों का उपयोग किया गया था।
कोरोना महामारी के चरम समय को कोई भुला नहीं सका। पूरी दुनिया में लाखों लोगों ने इस वायरस के कारण जान गंवा दी। पर कुछ ऐसे भी लोग थे, जो इस बुरे समय भी पैसा कमाना नहीं भुले। दरअसल, पुणे पुलिस ने एक पूर्व मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी और दो अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन पर आरोप है कि इन लोगों ने साल 2021 में महामारी के दौरान नगर निगम द्वारा संचालित एक अस्पताल से कोविड-19 जांच किट, दवाएं और सैनिटाइजर का कथित तौर पर दुरुपयोग कर और उन्हें खुद के लाभ के लिए निजी अस्पतालों को बेच दिया।
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इन लोगों के खिलाफ केस
अधिकारी ने बताया कि वारजे मलवाड़ी पुलिस ने गुरुवार को पुणे नगर निगम के पूर्व मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आशीष भारती, डॉ. अरुणा तारडे और डॉ. ऋषिकेश गार्डी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उन्होंने बताया कि डॉ. सतीश कोलसुरे ने इस मामले को एक स्थानीय अदालत में उठाया था। अदालत ने पुलिस को केस दर्ज करने का आदेश दिया था।
अपने लाभ के लिए...
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने वारजे मालवाड़ी इलाके में अरविंद बरतक्के अस्पताल में जनवरी और दिसंबर 2021 के बीच मरीजों का कथित रूप से फर्जी रिकॉर्ड बनाया, ताकि ऐसा लगे कि सुविधा में परीक्षण किट, सैनिटाइजर और दवाओं जैसी सामग्रियों का उपयोग किया गया था।
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अधिकारी ने बताया कि आरोपी ने बाद में इन वस्तुओं को निजी लाभ के लिए निजी प्रयोगशालाओं और व्यक्तियों को बेच दिया और 80 लाख रुपये से 90 लाख रुपये तक का लाभ उठाया।