रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सीडीएस जनरल अनिल चौहान, सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे, नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार और वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल अमर प्रीत सिंह के साथ राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। बता दें, 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय सशस्त्र बलों की जीत की याद में 16 दिसंबर को पूरे देश में हर साल विजय दिवस मनाया जाता है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने विजय दिवस के मौके पर बंगलूरू में जवानों को श्रद्धांजलि दी।
इसके अलावा, रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित।
विजय दिवस के अवसर पर कोलकाता में पूर्वी कमान सेना मुख्यालय में विजय स्मारक पर जवानों को याद करते हुए उत्सव मनाया जा रहा है। वहीं, लेफ्टिनेंट जनरल केएस बरार ने विजय दिवस के अवसर पर चेन्नई के युद्ध स्मारक पर शहीद नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कंधे से कंधा मिलाकर यह युद्ध लड़ा
बांग्लादेश के उप उच्चायुक्त अंदालिब एलियास ने विजय दिवस के अवसर पर कोलकाता में बांग्लादेश का राष्ट्रीय ध्वज फहराया। उन्होंने कहा, 'विजय दिवस हमारे लिए सबसे महान अवसरों में से एक है। 52 साल पहले आज ही के दिन हमने जीत हासिल की थी। मैं भारत की जनता, सरकार और सशस्त्र बलों को बधाई देना चाहता हूं, जिन्होंने हमारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर यह युद्ध लड़ा। बांग्लादेश और भारत दोनों जीवंत लोकतंत्र हैं। हम दोस्त थे, हम दोस्त हैं और हम दोस्त बने रहेंगे।'
जब भी पड़ोसी मुल्क ने भारतीय सीमा को लांघने की कोशिश की या देश की भूमि पर कब्जा करने का प्रयास किया, उन्हें हार का सामना करना पड़ा। पड़ोसी मुल्क के सैनिकों का सामना भारतीय वीरों से हुआ। वह चाहे हाल में 09 दिसंबर 2022 को अरुणाचल के तवांग सेक्टर के यांग्त्से में एलएसी पर अतिक्रमण करने पर भारतीय सैनिकों का चीन के सैनिकों को खदेड़ना हो या 1971 में पाकिस्तान की सेना का धूल चटाना हो। भारतीय वीरों की शौर्य गाथा का इतिहास बहुत उपलब्धि पूर्ण रहा है।
देश आज विजय दिवस की 52वीं वर्षगांठ मना रहा है। 16 दिसंबर को हर साल विजय दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन 1971 में भारत ने पाकिस्तान को जंग में हराया था। इसी ऐतिहासिक जीत का जश्न हर साल मनाया जाता है। हालांकि इस जंग में भारतीय सैनिकों ने बड़े पैमाने पर कुर्बानियां भी दी थीं। करीब 3900 भारतीय सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए थे, जबकि 9851 सैनिक घायल हुए। आज देश के वीर सिपाहियों के शौर्य, अदम्य साहस, कुर्बानी को नमन किया जा रहा है। आइए जानते हैं 1971 में हुए भारत पाक युद्ध के बारे में और भारतीय वीरों की विजय गाथा की कहानी।
क्यों मनाते हैं विजय दिवस
1971 में पाकिस्तान और भारत के बीच जंग हुई थी। इस जंग में पाक सेना को करारी हार मिली और 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को आत्मसमर्पण करना पड़ा। युद्ध के बाद पूर्वी पाकिस्तान स्वतंत्र हो गया। आज यही क्षेत्र स्वतंत्र देश बांग्लादेश बन गया है।
पाकिस्तानी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एएके नियाजी ने भारतीय पूर्वी सैन्य कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था।
16 दिसंबर को ही क्यों मनाते हैं विजय दिवस ?
दरअसल, 16 दिसंबर की शाम ही जनरल नियाजी ने आत्मसमर्पण के कागजों पर हस्ताक्षर किए थे। इसी दिन सुबह जनरल जैकब को मानेकशॉ का संदेश मिला था कि आत्मसमर्पण की तैयारी के लिए तुरंत ढाका पहुंचें। उस दौरान जैकब की हालत बिगड़ रही थी।
इस जंग में उस समय तक भारत के अपने कई सैनिकों को खो दिया था और हमारे पास केवल तीन हजार सैनिक ही बचे थे जो कि ढाका से 30 किलोमीटर दूर थे। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तानी सेना के कमांडर के पास ढाका में 26 हजार 400 सैनिक थे। लेकिन भारतीय सेना ने युद्ध पर पूरी तरह से पकड़ बना ली थी। ढाका में उस शाम नियाजी के कमरे में पाकिस्तानी कमांडर ने आत्मसमर्पण के दस्तावेजों पर साइन कर दिया।
रो पड़े थे पाकिस्तानी कमांडर
आत्मसमर्पण के दस्तावेज पर दस्तखत करने के बाद नियाजी ने अपनी रिवाल्वर जनरल अरोड़ा के हवाले कर दी। नियाजी की आंखों में आंसू थे। रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय लोग नियाजी की हत्या करने की मांग कर रहे थे। लेकिन भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने नियाजी को सुरक्षित वापस भेजा। भारत की इस जीत की खबर से उस दौरान इंदिरा गांधी ने लोकसभा में युद्ध में भारत की जीत की घोषणा की, जिसके बाद सदन समेत पूरा देश जश्न में डूब गया।