मु्ख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और न्यायाधीश मनोज मिश्रा की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि प्रशासन की दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए सभी जिला अदालतों के लिए इस मामले में एक समान निर्देश नहीं दिए जा सकते।
सुप्रीम कोर्ट ने जिला न्यायालयों में शाम को अदालत लगाने और वर्चुअल सुनवाई के निर्देश देने से मना कर दिया है। कोर्ट ने देशभर की जिला न्यायालयों में शाम अदालत और वर्चुअल सुनवाई के निर्देश देने की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि हम सभी के लिए एक जैसा समाधान पेश नहीं कर सकते।
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मु्ख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और न्यायाधीश मनोज मिश्रा की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि प्रशासन की दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए सभी जिला अदालतों के लिए इस मामले में एक समान निर्देश नहीं दिए जा सकते।
पीठ ने याचिका कर्ता से पूछा कि क्या आप जानते हैं कि देश में कितनी जिला अदालतें हैं? आपने शाम की अदालतों की मांग की है। वकील इसका विरोध करेंगे। अगर हम निर्देश देते हैं कि शाम की अदालतें होंगी तो नियमित अदालतों में पूरे दिन बहस करने के बाद वकील को शाम की अदालतों में बहस करना होगा? हम सभी के लिए एक जैसा समाधान नहीं दे सकते। देश इतना बड़ा और जटिल है कि यह संभव नहीं है।
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मामले को लेकर किशन चंद जैन ने जनहित याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि ट्रायल कोर्ट में वर्चुअल सुनवाई चरणबद्ध तरीके से हो सकती है। याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा ये नीतिगत मामले हैं और देश इतना जटिल है कि अदालत इस तरह के निर्देश जारी नहीं कर सकती।
इसके बाद पीठ ने ई-कोर्ट परियोजना के तीसरे चरण के तहत हुई प्रगति का जिक्र किया। पीठ ने कहा कि वर्चुअल कोर्ट पर ध्यान दिया जा रहा है। हमें सरकार ने 7000 करोड़ रुपये का बजट दिया है। वर्चुअल सुनवाई ई-कोर्ट परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कोर्ट में वर्चुअल सुनवाई को लेकर पहल होने के बाद न्यायपालिका में काफी हद तक तकनीकी बदलाव होंगे।