सरकार और व्यवस्था जब जाग रही होती है तो देश चैन की नींद सोता है। प्रधान भविष्य निधि आयुक्त वीपी जॉय के अनुसार कर्मचारी भविष्य निधि पर यह कहावत सटीक बैठती है। अमर उजाला से खास बातचीत में जॉय ने बताया कि वह आने वाले समय में पूरी भविष्य निधि प्रणाली को डिजिटलाइज करने जा रहे हैं ताकि कर्मियों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
वीपी जॉय के मुताबिक इस उद्देश्य को ध्यान में रखकर ही स्थायी भविष्य निधि खाता नंबर (यूएएन) जारी करने का निर्णय लिया गया है। इसे तेजी से लागू कराया जा रहा है। इसे आधार संख्या, मोबाइल फोन और ई-मेल से जोड़ा जा रहा है। मोबाइल एप जैसे विकल्प पर भी काम हो रहा है ताकि देश के हर कर्मचारी को अपनी भविष्य निधि के बारे में समय-समय पर पूरी जानकारी मिलती रहे।
आगे की योजना यह है कि कर्मचारी चाहे जितनी नौकरी और नौकरी का स्थान बदले, वह भविष्य निधि को लेकर तंग नहीं होगा। नियोक्ता को भी इसके लिए कोई परेशानी नहीं होगी। उनका पीएफ अपने आप उनके नियुक्ति वाले स्थान पर स्थानांतरित होता रहेगा। जॉय ने बताया कि इसको लेकर केंद्रीय श्रम मंत्रालय लगातार प्रयासरत है। विभाग उच्चस्तर पर सतर्कता बरत रहा है, जिससे आने वाले समय में कर्मचारियों को उनके पैसे से एक बेहतर सामाजिक सुरक्षा दी जा सके। नई योजनाओं को अमल में लाने में अभी छह माह तक का समय लग सकता है।
प्रधान भविष्य निधि आयुक्त ने कहा कि अब भी पीएफ को लेकर तमाम तरह की जटिलताएं हैं। इनका लगातार सरलीकरण किया जा रहा है। कर्मचारियों की पीएफ से जुड़ी समस्याओं का सुनवाई के दौरान निबटारा किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने स्वीकारा कि कई संस्थान अपने कर्मचारियों का स्थायी भविष्य निधि एकाउंट खुलवाने में परहेज कर रहे हैं। स्थायी और अस्थायी या कर्मचारी को करार पर रखने को लेकर तरह-तरह के तर्क दिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि कर्मचारी भले ही करार पर क्यों न हो लेकिन अब उसका पीएफ अकाउंट होना जरूरी है।