घड़ियाल
रह गए थे : 200 से कम
आज संख्या : 1900 केवल चंबल नदी में
किसी समय भारत की नदियों में हजारों की संख्या में मिलने वाले घड़ियाल शिकार बांध वह बिजली परियोजनाओं और नदियों में बढ़े प्रदूषण की वजह से 2006 तक घटकर 2 से से भी कम रह गए।
1980 में संरक्षण कार्यक्रम शुरू किए गए : साल 2012 तक इनकी संख्या करीब 900 पहुंची। अब नदियों में यह नजर आने लगे हैं उड़ीसा में महानदी में घड़ियाल 40 साल बाद प्राकृतिक रूप से प्रजनन करने लगे हैं।
व्हाइट रम्प्ड वल्चर
कभी मिलते थे : करोड़ों में
अब बचे रह गए थे : 1 प्रतिशत
भारत में करोड़ों की संख्या में मिलने वाले गिद्ध 1990 तक सिर्फ 1 फीसदी बचे थे। वजह, मरते पशुओं में डाइक्लोफेनेक जैसी दवाओं का इस्तेमाल था, जिन्हें खाने पर इनके गुर्दे खराब हो रहे थे।
वापसी
2001 में चंडीगढ़ के पास पिंजौर में जटायु संरक्षण व प्रजनन केंद्र शुरू हुआ
बीते वर्ष दिसंबर में इस सेंटर द्वारा पहली बार 8 व्हाइट रम्प्ड वल्चर जंगल में छोड़े गए।