प्रवर्तन निदेशालय ने अन्नाद्रमुक नेता टीटीवी दिनाकरन को पूछताछ के लिए 22 अप्रैल को पेश होने के लिए नया समन जारी किया है। ईडी के अधिकारियों ने बताया कि उन्हें यह समन चुनाव आयोग के अधिकारियों को कथित रूप से घूस देने से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भेजा है। इस मामले में ईडी उनसे पूछताछ करेगी। दिनाकरन पर दो पत्तियों वाले चुनाव चिन्ह पर आयोग का फैसला अपने गुट के पक्ष में कराने के लिए रिश्वत देने की कोशिश करने का आरोप है।
अधिकारियों ने बताया कि 12 अप्रैल को उनसे पूछताछ की गई थी। उनका बयान पहली बार यहां की संघीय एजेंसी ने करीब 8 घंटे तक दर्ज किया था। प्रवर्तन निदेशालय ने हाल ही में इस मामले के एक अन्य आरोपी सुकेश चंद्रशेखर को गिरफ्तार किया है। जिसके बाद 58 वर्षीय राजनेता दिनाकरन के खिलाफ एजेंसी ने जांच के लिए नोटिस भेजा है। अधिकारियों ने बताया कि 22 अप्रैल को होने वाली अगले दौर की पूछताछ का उद्देश्य जांच को आगे बढ़ाना है। एजेंसी पिछले एक हफ्ते से चंद्रशेखर से भी इस मामले में पूछताछ कर रही है।
12 अप्रैल की देर रात ईडी कार्यालय से बाहर निकलते समय दिनाकरन ने संवाददाताओं से कहा था कि उन्होंने एजेंसी के साथ सहयोग किया और सुकेश चंद्रशेखर मामले में उनके सवालों का जवाब दिए थे।अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने इस महीने की शुरुआत में इस मामले में चंद्रशेखर का बयान दर्ज किया है और अब वे दिनाकरन से पूछताछ करना चाहते हैं। साथ ही जांच को आगे बढ़ाने के लिए चंद्रशेखर से उनका सामना कराना चाहते हैं।
ईडी का ये मामला धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के आपराधिक प्रावधानों के तहत 2017 में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा द्वारा आरोपी के खिलाफ प्राथमिक प्राथमिकी दर्ज करने पर आधारित है।
चंद्रशेखर को अप्रैल 2017 में दिल्ली पुलिस ने तमिलनाडु में आर के नगर विधानसभा सीट के उपचुनाव में अन्नाद्रमुक के दो पत्तों के चुनाव चिह्न शशिकला गुट के लिए चुनाव आयोग के अधिकारियों को रिश्वत देने के लिए दिनाकरन से पैसे लेने के आरोप में एक पांच सितारा होटल से गिरफ्तार किया था।
दिनाकरन को दिल्ली पुलिस ने चार दिनों की पूछताछ के बाद चुनाव आयोग के अधिकारियों को चुनाव चिह्न के लिए रिश्वत देने का प्रयास करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। दिनाकरन के करीबी सहयोगी मल्लिकार्जुन को भी उनके और चंद्रशेखर के बीच 50 करोड़ रुपये के सौदे में कथित तौर पर मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
दरअसल, तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री जे जयललिता की 5 दिसंबर, 2016 को मृत्यु हो जाने के कारण उपचुनाव की कराने की जरूरत पड़ी थी। उस समय अन्नाद्रमुक के चुनाव चिन्ह को लेकर जब दो धड़ों ने इस पर अपना दावा किया तो चुनाव आयोग ने इस पर रोक लगा दी थी। इन दो धड़ों में से एक का नेतृत्व दिनाकरन की चाची शशिकला ने किया था और दूसरे का पूर्व मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम ने नेतृत्व किया था।
दिनाकरण उस समय अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के उप महासचिव थे और उन्हें जयललिता की विश्वासपात्र शशिकला के साथ अगस्त 2017 में पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। बाद में उन्होंने अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके) नामक अपनी राजनीतिक पार्टी शुरू की।