राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में राज्य उपभोक्ता आयोग और जिला उपभोक्ता आयोगों में एक उपभोक्ता मध्यस्थता प्रकोष्ठ की स्थापना की मांग की गई। इसे लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है।
हाईकोर्ट की जस्टिस रेखा पल्ली की पीठ ने इस पर दिल्ली सरकार, राज्य उपभोक्ता आयोग व अन्य संबद्ध पक्षों से जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई इसी साल 20 दिसंबर को की जाएगी। याचिकाकर्ता अभिजीत मिश्रा ने अधिवक्ता पायल बहल के माध्यम से यह याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है कि दिल्ली सरकार ने उपभोक्ता मध्यस्थता प्रकोष्ठ की स्थापना नहीं की है। सरकार ने जिला उपभोक्ता आयोगों और राज्य उपभोक्ता आयोग के लिए किसी मध्यस्थ को पैनल में नहीं रखा है। दिल्ली सरकार उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 74 और धारा 75 के अनुसार मध्यस्थता प्रकोष्ठ की स्थापना के अपने प्राथमिक दायित्व में विफल रही है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की सरकार ने ऐसे नियमों को अपनाने के लिए कदम नहीं उठाए हैं और नागरिक मध्यस्थता के लाभों से वंचित हैं। दिल्ली सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता अनुज अग्रवाल ने कहा कि प्रतिवादी द्वारा मध्यस्थता केंद्र स्थापित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट ने बाद में इस संबंध में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने इस संबंध में स्टेटस रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने नागरिक प्रक्रिया संहिता 1908 की धारा 89 की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है। इस धारा दो पक्षों के बीच विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र के रूप में मध्यस्थता सेल के गठन की जरूरत बताई गई है। याचिका में कहा गया है कि मध्यस्थता प्रकोष्ठों के बगैर नागरिक उपभोक्ता आयोगों में लंबी मुकदमेबाजी में फंसने को मजबूर होते हैं।