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Election Result Analysis: 10 सवालों में जानें पांच राज्यों में आखिर क्या हुआ, क्या मोदी की लहर बरकरार है?

सार

Election Results 2022: पांच में से चार राज्यों में भगवा गुलाल छाया तो पंजाब में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने कमाल दिखाया।
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नरेंद्र मोदी, योगी आदित्यनाथ और अरविंद केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पांच राज्यों के गुरुवार (10 मार्च) को आए नतीजे आने वाले समय में भारतीय राजनीति की दशा और दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। भाजपा ने जहां चार राज्यों में अपनी सत्ता बरकरार रखी, वहीं पंजाब में आम आदमी पार्टी ने सभी राजनीतिक दलों पर झाड़ू फेर दी। वैसे ये चुनाव पार्टियों से ज्यादा चेहरों की वजह से चर्चा में रहे। पंजाब, उत्तराखंड में मौजूदा सीएम ही चुनाव हार गए। पंजाब में भी कई बड़े नेताओं को हार का सामना करना पड़ा तो योगी आदित्यनाथ भाजपा को उत्तर प्रदेश में लगातार दूसरी बार जीत दिलाने में कामयाब रहे। 10 सवालों में जानते हैं कि चुनाव नतीजों में आखिर हुआ क्या और इन नतीजों के मायने क्या हैं...

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1. सबसे पहले पांच बिंदुओं में जानते हैं कि चुनाव नतीजों में आखिर हुआ क्या?

  • भाजपा पांच में से चार राज्यों में जीती। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में उसकी सीटें घटीं, लेकिन मणिपुर और गोवा में उसे फायदा हुआ है।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी एक रैली में जो नारा दिया था, वह सही साबित हुआ। उत्तर प्रदेश में योगी भाजपा के लिए उपयोगी साबित हुए।
  • पंजाब के नतीजे चौंकाने वाले रहे। यहां आम आदमी पार्टी की लहर में कांग्रेस को काफी नुकसान हुआ। अकाली दल ने भी सीटें गंवाईं।
  • उत्तराखंड में भाजपा फिर सरकार बनाने जा रही है। हालांकि, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद चुनाव हार गए।
  • गोवा में भी भाजपा बहुमत से एक सीट दूर रह गई। अब उसे सरकार बनाने के लिए समर्थन की जरूरत है।
  • मणिपुर में भाजपा ने कमाल किया और पहली बार पूर्ण बहुमत मिला। 

2. वे बड़े चेहरे कौन से हैं, जिनकी हार ने चौंका दिया? 

  • लहर आती है तो बड़े-बड़े नेता भी चुनाव हार जाते हैं। यह बात पंजाब के नतीजों से एक बार फिर साबित हो गई। यहां आम आदमी पार्टी की झाड़ू ऐसी चली कि क्या मुख्यमंत्री, क्या उप मुख्यमंत्री और क्या पूर्व मुख्यमंत्री, सब हार गए। मौजूदा सीएम चरणजीत सिंह चन्नी एक नहीं, बल्कि दो-दो सीटों से मैदान में थे। भदौड़ और चमकौर साहिब, दोनों सीटों पर उन्हें आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों ने हरा दिया।
  • अकाली दल के पूर्व प्रमुख और पांच बार मुख्यमंत्री रहे 94 साल के प्रकाश सिंह बादल भी अपनी परंपरागत सीट लंबी से चुनाव हार गए। पूर्व मुख्यमंत्री और पंजाब लोक कांग्रेस के मुखिया कैप्टन अमरिंदर सिंह पटियाला से, पूर्व उपमुख्यमंत्री और अकाली प्रमुख सुखबीर सिंह बादल जलालाबाद से, पंजाब के निवर्तमान डिप्टी सीएम ओपी सोनी अमृतसर मध्य से और पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू अमृतसर पूर्व से हार गए। पंजाब के इन सभी बड़े चेहरों को आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों ने हराया।
  • उत्तराखंड की बात करें तो यहां की खटीमा सीट से मौजूदा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हार गए। उधर, उत्तर प्रदेश में भाजपा छोड़कर सपा में शामिल हुए स्वामी प्रसाद मौर्य और धर्म सिंह सैनी हार गए। भाजपा के फायरब्रांड नेता संगीत सोम, योगी सरकार में शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी, यूपी सरकार में गन्ना मंत्री सुरेश राणा और केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल को भी हार का सामना करना पड़ा।

3. उत्तर प्रदेश में क्या हुआ?

  • अब उत्तर प्रदेश पर लौटते हैं। इस राज्य के नतीजों को लेकर 14 में से 11 एग्जिट पोल में जो अनुमान लगाया गया, वह सही साबित हुआ। भाजपा लगातार दूसरी बार चुनाव जीतने में कामयाब रही, लेकिन उसे सीटों का नुकसान हुआ। इसी के साथ भाजपा 1985 के बाद राज्य में लगातार दूसरी बार सरकार बनाने वाली पहली पार्टी बन गई। इससे पहले कांग्रेस ने 1980 और फिर 1985 में लगातार दो बार उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव जीता था। 
  • सीटों की बात करें तो रात आठ बजे तक की स्थिति के मुताबिक राज्य में भाजपा और उसके सहयोगी दलों को 270 से ज्यादा सीटें मिल रही हैं, जो पिछली बार से कम हैं। वहीं, सपा को 124 सीटें मिल रही हैं। उसे पिछली बार से काफी ज्यादा फायदा हुआ, लेकिन इतना भी नहीं कि अखिलेश यादव सरकार बनाने की सोच सकें। सपा ने भाजपा और बसपा, दोनों को नुकसान पहुंचाया। बता दें कि 403 सीटों वाले उत्तर प्रदेश में बहुमत का आंकड़ा 202 है। 

4. उत्तराखंड में क्या हुआ?

उत्तराखंड में हर चुनाव में सरकार बदल जाने का ट्रेंड इस बार टूट गया। यहां कांग्रेस की सीटें बढ़ीं। वह शुरुआती रुझानों में 34-34 की बराबरी पर थी, लेकिन बाद में भाजपा से काफी पिछड़ गई और मुकाबला भाजपा के पक्ष में एकतरफा हो गया। यहां माना गया था कि आम आदमी पार्टी कुछ सीटें जीतेगी, लेकिन वह खाली हाथ रही। 70 सीटों वाले उत्तराखंड में भाजपा को करीब 10 सीटों के नुकसान के बावजूद 47 सीटें मिल रही हैं, जो बहुमत के 36 सीटों के आंकड़े से ज्यादा हैं।

5. पंजाब में किसकी सरकार?

पंजाब में आम आदमी पार्टी की आंधी चली। वह दिल्ली के बाहर पहली बार सरकार बनाने जा रही है, वह भी तीन-चौथाई बहुमत के साथ। 117 सीटों वाले पंजाब में बहुमत का आंकड़ा 59 है और आम आदमी पार्टी 92 सीटों पर जीत रही है। सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को हुआ। वह महज 18 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस को 55 से ज्यादा और अकालियों का 10 से ज्यादा सीटों का नुकसान हुआ। 

6. गोवा और मणिपुर में क्या हुआ?

गोवा के नतीजे भी भाजपा के पक्ष में ही माने जाएंगे। 40 सीटों वाले गोवा में भाजपा 20 सीटें जीत रही है, लेकिन सहयोगियों के साथ बहुमत का 21 सीटों का आंकड़ा आसानी से पार हो जाएगा। आखिर में बात मणिपुर की। 60 सीटों वाले मणिपुर में सरकार बनाने के लिए 31 का आंकड़ा चाहिए। रात 8 बजे तक की स्थिति के मुताबिक, भाजपा 32 सीटों तक पहुंच सकती है। उसे पहली बार अपने दम पर बहुमत मिल सकता है। कांग्रेस को यहां 20 से ज्यादा सीटों का नुकसान हुआ है।

7. क्या ब्रांड मोदी मजबूती से कायम है?

कहा जा सकता है कि मोदी का जादू बरकरार है, क्योंकि पांच में चार राज्यों में भाजपा को जीत मिली है। चर्चा पंजाब की ज्यादा हुई, लेकिन भाजपा के लिए यूपी के नतीजे मायने रखते हैं, जहां पार्टी अपने प्रचार में केंद्र में मोदी और यूपी में योगी की अहमियत पर जोर देती रही। भाजपा उत्तराखंड में आसानी से सरकार बना लेगी। गोवा-मणिपुर में उसे ज्यादा परेशानी नहीं होगी। सिर्फ पंजाब में वह सत्ता की दौड़ से बाहर है, जहां पूरे राज्य में कभी उसकी जमीन थी ही नहीं। 

8. योगी के लिए यह जीत कितनी बड़ी?

2017 में जब उत्तर प्रदेश में चुनाव हो रहे थे, तब योगी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नहीं थे। पीएम मोदी के चेहरे को आगे रखकर भाजपा ने वह चुनाव लड़ा। बाद में योगी सीएम बने। इस बार जाहिर तौर पर भाजपा ने उन्हीं के नेतृत्व में चुनाव लड़ा। यह चुनावी जीत भाजपा में योगी की पकड़ मजबूत करेगी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में उनकी स्वीकार्यता को और बढ़ाएगी। यह जानना दिलचस्प होगा कि भविष्य में भाजपा उन्हें केंद्र की राजनीति में किस तौर पर देखेगी।

9. वे कौन से चेहरे हैं, जिनकी भूमिका इन नतीजों से बदल जाएगी?

  • इस फेहरिस्त में पहला नाम अरविंद केजरीवाल का है। दिल्ली में वह सरकार चला रहे हैं और अब पंजाब की जीत ने उन्हें भाजपा विरोधी गुट में ममता बनर्जी जैसे बड़े चेहरों के बराबर लाकर खड़ा कर दिया है। दिल्ली-पंजाब की कुल लोकसभा सीटें बंगाल के मुकाबले आधी हैं, लेकिन अब केजरीवाल की पार्टी दो राज्यों की सत्ता संभालेगी। यानी कद कांग्रेस के बराबर होगा, जो अब अपने बूते सिर्फ छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सत्ता में है।
  • नजरें भगवंत मान पर हैं, जो आम आदमी पार्टी के सांसद हैं। केजरीवाल ने उन्हें सीएम उम्मीदवार घोषित किया था। उन्होंने स्टैंडअप कॉमेडियन से सीएम कैंडिडेट बनने तक का सफर तय किया है। भगवंत सीएम बने तो उनके सामने केजरीवाल के दिल्ली मॉडल की तर्ज पर सरकार चलाने की चुनौती होगी।
  • चुनाव हारने के बावजूद अगर भाजपा पुष्कर सिंह धामी को ही मुख्यमंत्री बनाती है तो बार-बार नेतृत्व परिवर्तन को झेल चुके इस राज्य में उनकी भूमिका मजबूत होगी।
  • राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के सामने कांग्रेस को देश की राजनीति में बनाए रखने की चुनौती होगी।
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10. देश का सियासी नक्शा अब कैसा है?

भाजपा 18 राज्यों में अपनी सत्ता बरकरार रखने में कामयाब रही। कांग्रेस के हाथ से एक और राज्य फिसल गया। पंजाब में हार के बाद अब कांग्रेस अपने बूते सिर्फ राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सत्ता में है। वहीं, तमिलनाडु, झारखंड और महाराष्ट्र में वह गठबंधन सरकारों में सहयोगी है।
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