उत्तराखंड में हर चुनाव में सरकार बदल जाने का ट्रेंड इस बार टूट गया। यहां कांग्रेस की सीटें बढ़ीं। वह शुरुआती रुझानों में 34-34 की बराबरी पर थी, लेकिन बाद में भाजपा से काफी पिछड़ गई और मुकाबला भाजपा के पक्ष में एकतरफा हो गया। यहां माना गया था कि आम आदमी पार्टी कुछ सीटें जीतेगी, लेकिन वह खाली हाथ रही। 70 सीटों वाले उत्तराखंड में भाजपा को करीब 10 सीटों के नुकसान के बावजूद 47 सीटें मिल रही हैं, जो बहुमत के 36 सीटों के आंकड़े से ज्यादा हैं।
पंजाब में आम आदमी पार्टी की आंधी चली। वह दिल्ली के बाहर पहली बार सरकार बनाने जा रही है, वह भी तीन-चौथाई बहुमत के साथ। 117 सीटों वाले पंजाब में बहुमत का आंकड़ा 59 है और आम आदमी पार्टी 92 सीटों पर जीत रही है। सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को हुआ। वह महज 18 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस को 55 से ज्यादा और अकालियों का 10 से ज्यादा सीटों का नुकसान हुआ।
गोवा के नतीजे भी भाजपा के पक्ष में ही माने जाएंगे। 40 सीटों वाले गोवा में भाजपा 20 सीटें जीत रही है, लेकिन सहयोगियों के साथ बहुमत का 21 सीटों का आंकड़ा आसानी से पार हो जाएगा। आखिर में बात मणिपुर की। 60 सीटों वाले मणिपुर में सरकार बनाने के लिए 31 का आंकड़ा चाहिए। रात 8 बजे तक की स्थिति के मुताबिक, भाजपा 32 सीटों तक पहुंच सकती है। उसे पहली बार अपने दम पर बहुमत मिल सकता है। कांग्रेस को यहां 20 से ज्यादा सीटों का नुकसान हुआ है।
कहा जा सकता है कि मोदी का जादू बरकरार है, क्योंकि पांच में चार राज्यों में भाजपा को जीत मिली है। चर्चा पंजाब की ज्यादा हुई, लेकिन भाजपा के लिए यूपी के नतीजे मायने रखते हैं, जहां पार्टी अपने प्रचार में केंद्र में मोदी और यूपी में योगी की अहमियत पर जोर देती रही। भाजपा उत्तराखंड में आसानी से सरकार बना लेगी। गोवा-मणिपुर में उसे ज्यादा परेशानी नहीं होगी। सिर्फ पंजाब में वह सत्ता की दौड़ से बाहर है, जहां पूरे राज्य में कभी उसकी जमीन थी ही नहीं।
2017 में जब उत्तर प्रदेश में चुनाव हो रहे थे, तब योगी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नहीं थे। पीएम मोदी के चेहरे को आगे रखकर भाजपा ने वह चुनाव लड़ा। बाद में योगी सीएम बने। इस बार जाहिर तौर पर भाजपा ने उन्हीं के नेतृत्व में चुनाव लड़ा। यह चुनावी जीत भाजपा में योगी की पकड़ मजबूत करेगी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में उनकी स्वीकार्यता को और बढ़ाएगी। यह जानना दिलचस्प होगा कि भविष्य में भाजपा उन्हें केंद्र की राजनीति में किस तौर पर देखेगी।
भाजपा 18 राज्यों में अपनी सत्ता बरकरार रखने में कामयाब रही। कांग्रेस के हाथ से एक और राज्य फिसल गया। पंजाब में हार के बाद अब कांग्रेस अपने बूते सिर्फ राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सत्ता में है। वहीं, तमिलनाडु, झारखंड और महाराष्ट्र में वह गठबंधन सरकारों में सहयोगी है।