हिमांशु शितोले कहते हैं कि ऐसे में यह कहना कि महाराष्ट्र में राज ठाकरे भाजपा के लिए मजबूरी हैं, पूरी तरह से गलत होगा। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राज ठाकरे के साथ भारतीय जनता पार्टी के जुड़ने से मनोवैज्ञानिक तौर पर मराठा वोटबैंक में भारतीय जनता पार्टी अपना एक असर तो छोड़ेगी। मराठी वोटरों को अपने साथ जोड़ने के लिए भारतीय जनता पार्टी के पास एकनाथ शिंदे जैसे नेता और उनकी पार्टी के विधायक समेत अजीत पवार का फिलहाल मजबूत साथ बना हुआ है। इसलिए राज ठाकरे भारतीय जनता पार्टी के लिए मराठी वोट बैंक को जोड़ने के लिए लिहाज से बड़ी मजबूरी बिल्कुल नहीं हैं।
सियासी जानकारों का मानना है कि मनोवैज्ञानिक तौर से मनसे से जुड़कर भारतीय जनता पार्टी एक बड़ा संदेश इस गठबंधन के माध्यम से मराठी वोटरों को दे सकती है। लेकिन सही मायनों में यह गठबंधन होने वाले बीएमसी चुनावों में राज ठाकरे को फायदा पहुंचा सकता है। राजनीतिक जानकार निखिल चंद्रभाई वाडवलकर कहते हैं कि बीते कुछ चुनावों में राज ठाकरे का सियासी सफर 2009 की तुलना में बहुत नीचे गया है। ऐसे में भाजपा से ज्यादा राज ठाकरे को अपने राजनीतिक दल और सियासी सफर की चिंता है। यह गठबंधन राज ठाकरे को बीएमसी जैसे चुनाव में एक बूस्टर डोज जैसा हो सकता है।
आंकड़ों के मुताबिक 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में राज ठाकरे ने 101 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। इस चुनाव में महज एक प्रत्याशी ही चुनाव जीता था। जबकि इसी विधानसभा चुनाव में पार्टी के 86 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक मनसे को इस चुनाव में तकरीबन सब दो फीसदी वोट मिले थे।