दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दो दिन पहले पंजाब गए, तो उन्होंने ऑटो वालों से अपनी सरकार बनने पर तमाम वादों की झड़ी लगा दी। उसी दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने ऑटो वालों से अपना कनेक्शन निकालते हुए यह तक कह दिया कि उन्होंने भी ऑटो चलाया है, इसलिए वे ऑटो वालों का दुख दर्द समझते हैं। इसलिए उनकी सरकार ने ऑटो वालों के लिए विशेष योजनाएं भी बनाई हैं। गोवा में ऑटो वालों के लिए राजनैतिक पार्टियों ने जमकर प्यार उड़ेला, तो उत्तराखंड में भी ऑटो वालों पर राजनीतिक पार्टियों की ओर से जमकर मोहब्बत बरसाई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है व्यक्तिगत तौर पर विशेष समुदाय को अपनी तरफ जोड़ना राजनीतिक पार्टियों के लिए फायदेमंद सौदा साबित होता है।
पंजाब, गोवा, उत्तर प्रदेश हो या उत्तराखंड, इन सभी राज्यों में राजनीतिक पार्टियां इन दिनों छोटे-छोटे व्यापारी समुदाय और रोज कमाने खाने वाले वर्गों पर फोकस करते हुए उनसे संपर्क स्थापित कर रही हैं। खासतौर से ऑटो वालों पर फोकस करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जिन राज्यों में राजनीतिक दौरा करने जा रहे हैं, वहां इनसे न सिर्फ मुखातिब होते हैं बल्कि इस विशेष समुदाय के लिए योजनाओं की झड़ी भी लगा रहे हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में जाकर ऑटो वालों के लिए तमाम तरीके के वादे किए। इस दौरान केजरीवाल लुधियाना में एक ऑटो ड्राइवर के साथ उसके ऑटो में बैठ कर ना सिर्फ उसके घर गए बल्कि खाना भी खाया।
ऑल इंडिया ऑटो एंड टैक्सी यूनियन से जुड़े सतनाम सिंह कहते हैं कि उनकी समस्याएं बहुत हैं। लेकिन उन्हें सुनने वाला कोई नहीं है। सतनाम कहते हैं कि उनकी सबसे ज्यादा समस्याएं आरटीओ ऑफिस से लेकर पुलिस वालों तक की होती हैं। लेकिन जब वह किसी राजनेता या राजनीतिक पार्टियों के पास जाते हैं तो सीधे तौर पर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता है। वह कहते हैं कि यह एक अच्छी पहल है और राजनेता उनकी सुध ले रहे हैं. बल्कि व्यक्तिगत तौर पर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए आयोग, कमेटी और प्रमाण पत्र जैसी सुविधाएं जारी करने की बात की जा रही है।
गोवा टैक्सी ओनर एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी प्रकाश पुरखे कहते हैं कि उनकी समस्याओं को समाधान करने के लिए जो भी राजनैतिक दल सामने आएगा, वह सीधे तौर पर उससे जुड़कर न सिर्फ मतदान करेंगे, बल्कि ज्यादा से ज्यादा वोट करने की अपील भी लोगों से करेंगे। प्रकाश के मुताबिक गोवा में एक बहुत बड़े तबके की रोजी-रोटी टैक्सी और टूरिज्म से ही चलती है। वह कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि राजनीतिक पार्टियों ने उनसे पहले कोई वादे नहीं किये, लेकिन समस्या ये रही कि उन्हें अमल में नहीं ला पाए। यही नतीजा है कि वह लोग अभी भी तमाम तरीके की परेशानियों से जूझते रहते हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के प्रवक्ता प्रोफेसर सदानंद कोहली कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि सरकारें इनके लिए योजनाएं नहीं बनाती थीं। लेकिन अब राजनीतिक दल हाइपर लोकल होकर माइक्रो लेवल पर छोटे-छोटे व्यापारिक समुदाय और रोज कमाने खाने वाले लोगों को साधने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि यह राजनीतिक तौर पर राजनीतिक दलों को फायदा देने वाला ही होता है। प्रोफेसर कोहली के मुताबिक केंद्र सरकार या राज्य सरकार जो योजनाएं बनाती है वह लोगों की आय के मुताबिक ही योजनाओं का ज्यादातर क्रियान्वयन करती है। ऐसी दशा में रोज कमाने-खाने वाले भी उस योजना में शामिल हो जाते हैं। जिसमें ऑटो वाले, रेहड़ी वाले, टैक्सी वालों समेत तमाम छोटे- छोटे अति निम्न वर्गीय व्यापारी भी शामिल हैं। लेकिन अब राजनीतिक पार्टियों ने फोकस करते हुए रेहड़ी और ऑटो वालों के लिए योजनाएं बनानी शुरू कर दीं। सोसाइटी, दुकानों और सड़कों पर सुरक्षा करने वाले सिक्योरिटी गार्ड के लिए विशेष सुविधाएं और योजनाएं बनानी शुरू कर दीं।