सुरक्षा एजेंसियों ने फोन से धोखाधड़ी (फ्रॉड टू फोन) नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए रेलवे के एक इंजीनियर सहित मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और झारखंड से आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। आठ में से चार झारखंड, दो बालाघाट (एमपी) और दो आंध्र प्रदेश से हैं।यह गिरोह 18 राज्यों में फैला हुआ था।
हाल ही में रेलवे में उपइंजीनियर के पद पर भर्ती मध्य प्रदेश के 25 वर्षीय हुकुम सिंह बिसेन इस गिरोह के संपर्क में आकर अपराध में शामिल हो गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, इस गिरोह के 900 मोबाइल फोन, 1000 बैंक खाते और सैकड़ों एकीकृत भुगतान इंटरफेस और ई-कॉमर्स आईडी की भी पहचान की गई है और इसकी जांच जारी है।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों ने अब तक करीब 100 बैंक खातों और डेबिट व क्रेडिट कार्ड के लेन-देन पर भी रोक लगाई है। गिरोह के खिलाफ 18 राज्यों में अभियान चला और इसमें 350 लोग शामिल थे। यह अभियान केंद्रीय गृह मंत्रालय की साइबर सुरक्षा शाखा एफसीओआरडी, मध्य प्रदेश पुलिस और कुछ अन्य राज्यों के पुलिस बलों ने विशिष्ट सूचना पर चलाया था।
गिरोह में सैकड़ों सदस्य होते हैं जो एक लेनदेन के विभिन्न चरणों का संचालन करते हैं जिनमें ओटीपी, क्रेडिट कार्ड, ई-कॉमर्स जैसे फ्रॉड और फर्जी आईडी, फर्जी मोबाइल नंबर, फर्जी पता, काला बाजारी, कर चोरी, धन शोधन और चोरी के सामान की खरीद-फरोख्त शामिल है।
एक बुजुर्ग की शिकायत पर हुई कार्रवाई
एक अधिकारी ने बताया कि उदयपुर निवासी 78 वर्षीय एक बुजुर्ग व्यक्ति ने बीते 11 जून को साढ़े छह लाख रुपये की साइबर ठगी की शिकायत गृह मंत्रालय द्वारा संचालित साइबरसेफ एप पर दी थी। फ्रॉड टू फोन कॉल करने वाला झारखंड से ऑपरेट कर रहा था।
जांच के दौरान सामने आया कि ठगी गई रकम सीधे तीन एसबीआई कार्ड में जमा हुई, जिनका इस्तेमाल फ्लिपकार्ट से 33 चीन निर्मित श्योमी पोको एम3 मोबाइल फोन खरीदने के लिए किया गया। कुछ ही मिनटों में यह पता लगा लिया गया कि बालाघाट में यह फोन किस पते पर मंगाए गए और बालाघाट के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को इस बारे में सूचित किया गया।