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तालिबान के कब्जे का असर: दिवाली और शादी की मिठाईयों से गायब हो सकते हैं ड्राई फ्रूट्स, 30 फीसदी तक बढ़े दाम

Mon, 23 Aug 2021 07:14 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

देश की सबसे बड़ी ड्राई फ्रूट की मंडी खारी बावाली के व्यापारी संतोष भाई जैन ने बताया कि तकरीबन एक महीने से खारी बाबली में अफगानिस्तान के काबुल से आने वाले सामान की आवजाही रुकी हुई है। इससे यहां के बाजार से बदाम, मुनक्का, अंजीर और किशमिश की कमी बनी हुई है...
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ड्राई फ्रूट - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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अफगानिस्तान पर तालिबनी हुकूमत का कब्जा होने के बाद से इसका सीधा असर भारत के व्यापार पर नजर आने लगा है। सत्ता बदल होने के बाद से ही तालिबान ने अफगानिस्तान से होने वाले सभी आयात और निर्यात पर रोक लगा दी है। इसका प्रभाव देश के ड्राई फ्रूट्स बाजार पर दिखने लगा है। ड्राई फ्रूट्स के दाम आसमान तक पहुंच गए हैं। दशहरा, दिवाली और शादियों के सीजन को देखते हुए व्यापारी और आम खरीदार भी बेहद चिंतित नजर आ रहे हैं। काबुल से हर साल तीन सौ से चार सौ करोड़ रुपये का कारोबार तो दिल्ली के खारी बावली बाजार से होता है। इसलिए अफगानिस्तान के व्यापारियों के पास एडवांस में ही पैसा भी भेजा गया है लेकिन अब भारतीय व्यापारियों का न तो पैसा वापस मिल रहा है, न ही बदले में ड्राई फ्रूट्स। ऐसे में अब व्यापारियों की परेशानी ज्यादा बढ़ गई है।

एक माह से रूकी है सामान की आवाजाही

देश की सबसे बड़ी ड्राई फ्रूट की मंडी खारी बावाली के व्यापारी संतोष भाई जैन ने अमर उजाला को बताया कि तकरीबन एक महीने से खारी बाबली में अफगानिस्तान के काबुल से आने वाले सामान की आवजाही रुकी हुई है। इससे यहां के बाजार से बदाम, मुनक्का, अंजीर और किशमिश की कमी बनी हुई है। जो बादाम दस दिन पहले 600 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, वह अब 1000-1100 रुपये में बिक रहा है। अंजीर सिर्फ अफगानिस्तान से आता है। इसका रेट पहले 1000 रुपये प्रति किलो था, अब ये एक झटके में बढ़कर 1500 रुपये तक पहुंच गया है। खारी बाबली ड्राई फ्रूट का सबसे बड़ा थोक बाजार है। इसलिए दूसरे राज्यों में भी अभी पुराने माल ही सप्लाई की जा रही है। जब तक पुराना माल हमारे पास हैं, तब ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। लेकिन अगले महीने से मुश्किलें बढ़ जाएंगी। जबकि आगामी त्योहार के सीजन को देखते हुए लगातार मांग बढ़ रही है।

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80 फीसदी ड्राई फ्रूट्स अफगानिस्तान से आता है

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, तालिबान ने पाकिस्तान के ट्रांजिट रूट्स से होने वाली सभी कार्गो मूवमेंट रोक दी है। इसका सीधा असर दिल्ली समेत देश के कई शहरों में दिखने लगा है। ड्राई फ्रूट्स के दामों में जबरदस्त बढ़ोतरी हो गई है। हालांकि सरकार इसको लेकर काम कर रही है और जल्द ही कोई न कोई रास्ता निकालेगी। जबकि साउथ-नॉर्थ कॉरिडोर से ड्राई फ्रूट्स देश में अभी पहुंच रहा है। दुबई से आने वाले प्रोडक्ट्स भी बिना किसी रुकावट के यहां पहुंच रहे हैं। आज भारत में करीब 80 फीसदी ड्राई फ्रूट अफगानिस्तान से आता है। इसमें पिस्ता, बादाम, अंजीर, अखरोट शामिल है। बाजार में समय से ड्राई फ्रूट्स नहीं पहुंचने की स्थिति में इनके दामों में 200-250 रुपये प्रति किलो की बढ़ोत्तरी देखी गई हैं।

अभी ये हैं दिल्ली के मार्केट में ड्राई फ्रूट्स के भाव (प्रति किलो)

ड्राई फ्रूट्स        दाम पहले (रुपये में)      दाम अब (रुपये में)
अंजीर               700                          1000
किशमिश           500                           800
बादाम               800                         1100
काजू                 700                         1100
अंजीर               700                         1000
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पहले परिवार बचाएं फिर करेंगे व्यापार

अमर उजाला से चर्चा में खारी बावली के व्यापारी जैन ने आगे बताया कि अगर यही हालात रहे तो देश में त्यौहार और शादियों के सीजन में सूखे मेवे की कमी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा दामों में इससे ज्यादा भी तेजी आ सकती है। आज काबुल में तैयार माल तकरीबन एक महीने से अलग-अलग जगहों पर रुका हुआ है। वहां के व्यापारी साथी से बात करने की कोशिश तो जरूर करते हैं, लेकिन अभी हमें कामयाबी नहीं मिल रही है। तीन दिन पहले बात हुई भी थी वो डरे हुए थे कह रहे थे पहले अपने परिवार को बचा लें फिर आपके साथ व्यापार की बात करेंगे।

भारत क्या मंगाता है अफगानिस्तान से

दक्षिण एशिया में अफगानिस्तान के उत्पादों का सबसे बड़ा बाजार भारत है। वहां से भारत को मुख्य रूप से सूखे मेवे और फल मिलते हैं। किशमिश, अखरोट, बादाम, अंजीर, पाइन नट, पिस्ता, सूखी खूबानी का निर्यात अफगानिस्तान से प्रमुख रूप से होता है। इसके अलावा ताजे फल जैसे अनार, सेब, चेरी, खरबूजा, तरबूज और मसाले जैसे हींग, जीरा और केसर का भी आयात किया जाता है। एप्रीकोट, चेरी और औषधीय जड़ी बूटियां भी पड़ोसी देश से आती हैं। जबकि भारत से मुख्यतया चाय, काफी, कपास और काली मिर्च का निर्यात अफगानिस्तान को किया जाता है।

वित्त वर्ष 2020-21 में दोनों देशों के बीच 1.4 अरब डालर यानी लगभग 10,387 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ। भारत की तरफ से निर्यात की बात करें तो 2020-21 में अफगानिस्तान को करीब 6,129 करोड़ रुपये के उत्पाद भेजे गए थे। निर्यात की तुलना में भारत ने 3,783 करोड़ रुपये के उत्पादों का आयात अफगानिस्तान से किया था।
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