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विवाद: ईडी ने शाओमी इंडिया के जोर-जबरदस्ती के आरोपों को किया खारिज, कहा- कार्रवाई के बाद सोच-समझकर लगाए गए आरोप

Sat, 07 May 2022 08:50 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ईडी ने एक बयान जारी कर कहा कि पूरी कार्रवाई के दौरान कभी भी कंपनी के अधिकारियों को न तो धमकाया गया और न ही किसी तरह की जोर जबरदस्ती हुई। 
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विस्तार
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चीनी मोबाइल निर्माता कंपनी शाओमी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी शाओमी इंडिया के अधिकारियों द्वारा जोर जबरदस्ती के तहत बयान दर्ज कराने के आरोपों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को खारिज कर दिया। ईडी ने कहा कि कंपनी ने इस तरह के आरोप उन पर हुई कार्रवाई के बाद सोच-समझकर लगाए हैं। शाओमी ने कर्नाटक हाई कोर्ट के समक्ष हाल ही में दायर याचिका में आरोप लगाया था कि उसके शीर्ष अधिकारियों को बेंगलुरु में ईडी के जांचकर्ताओं ने पूछताछ के दौरान शारीरिक मारपीट और जोर जबरदस्ती की थी। 

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किसी तरह की जोर जबरदस्ती नहीं हुई
ईडी ने एक बयान जारी कर कहा कि हम एक निष्ठावान पेशेवर एजेंसी है। पूरी कार्रवाई के दौरान कभी भी कंपनी के अधिकारियों को न तो धमकाया गया और न ही किसी तरह की जोर जबरदस्ती हुई। यह आरोप कि ईडी द्वारा शाओमी इंडिया के अधिकारियों के बयान जबरन लिए गए असत्य और निराधार हैं। एजेंसी ने कहा कि शाओमी इंडिया के अधिकारियों ने विभिन्न मौकों पर अनुकूल माहौल में स्वेच्छा से फेमा के तहत ईडी के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए। ईडी ने कहा कि जांच के दौरान कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और सूचनाओं के आधार पर अधिकारियों ने बयान दिए। 

शाओमी इंडिया के 5,551 करोड़ रुपये जब्त करने का दिया था आदेश 
ईडी ने 29 अप्रैल को भारतीय विदेशी मुद्रा कानून (फेमा) के कथित उल्लंघन पर शाओमी इंडिया के 5,551 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जब्त करने का आदेश दिया था। कंपनी द्वारा जोर-जबरदस्ती के आरोप उसी सिलसिले में सामने आए हैं। हालांकि कर्नाटक हाई कोर्ट ने शुक्रवार को ईडी के इस आदेश पर रोक लगा दी है।
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एजेंसी ने कहा कि शाओमी के ग्लोबल वाइस प्रेसीडेंट मनु कुमार जैन का बयान चार बार 13 अप्रैल, 14 अप्रैल, 21 अप्रैल और 26 अप्रैल को दर्ज किया गया जबकि चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर समीर बी एस राव के बयान छह बार 25 मार्च, 14 अप्रैल, 19 अप्रैल, 21 अप्रैल, 22 अप्रैल और 26 अप्रैल को दर्ज किए गए। हालांकि, विभिन्न अवसरों पर बयान दर्ज करने के दौरान किसी भी समय उनके द्वारा कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई थी।

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