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Money Laundering Case: ED ने डायरेक्ट सेलिंग फर्म के तीन दर्जन बैंक खातों पर लगाई रोक, जब्त किए 90 करोड़ रुपये

Wed, 18 Jan 2023 11:22 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एजेंसी ने एक बयान में कहा, विहान डायरेक्ट सेलिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ धन शोधन के एक मामले में मंगलवार को मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई में छापेमारी की गई।
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प्रवर्तन निदेशालय। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने डायरेक्ट सेलिंग कंपनी के विभिन्न परिसरों में छापेमारी की। इसके बाद एजेंसी ने 90 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा रखने वाले तीन दर्जन बैंक खातों पर रोक लगा दी। ईडी ने बुधवार को यह जानकारी दी। 

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इंडियन डायरेक्ट सेलिंग एसोसिएशन के मुताबिक,  डायरेक्ट सेलिंग शब्द का सीधा सा मतलब है शीर्ष वैश्विक ब्रांडों और छोटी व उद्यमी कंपनियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले खुदरा चैनल के माध्यम से अंतिम उपयोगकर्ताओं को उत्पादों और सेवाओं की सीधे बिक्री करना।

एजेंसी ने एक बयान में कहा, विहान डायरेक्ट सेलिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ धन शोधन के एक मामले में मंगलवार को मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई में छापेमारी की गई।  ईडी ने कहा, ''तलाशी के दौरान ईडी ने मामले से जुड़ी विभिन्न कंपनियों, व्यक्तियों, मालिकों से जुड़े कुल 36 बैंक खातों पर रोक लगा दी है। बयान में आगे कहा गया,  आपत्तिजनक दस्तावेज और कुछ डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए हैं।   
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मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने क्यूनेट लिमिटेड, विजय ईश्वरन, विहान डायरेक्ट सेलिंग (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड और अन्य कंपनियों और व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।    

कंपनी ने एक बयान में कहा, 'भारत में क्यूनेट की मास्टर फ्रेंचाइजी 'विहान डायरेक्ट सेलिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' ने बड़ी संख्या में निर्दोष निवेशकों से प्राप्त धन को इधर-उधर करने के लिए विभिन्न सेल कंपनियों/डमी प्रोपराइटरशिप का इस्तेमाल किया है। ईडी ने आरोप लगाया, ''कंपनी ने डायरेक्ट सेलिंग कारोबार की आड़ में पोंजी योजना में अपनी गाढ़ी कमाई का निवेश कर भारत में बड़ी संख्या में निर्दोष निवेशकों को ठगा है।    

एजेंसी ने कहा, निवेशकों को कारोबार की प्रकृति और उनके निवेशित धन के उपयोग के विवरण के बारे में सूचित किए बिना भारी मुनाफे की आड़ में उनकी गाढ़ी कमाई से धोखा दिया गया। ईओडब्ल्यू की प्राथमिकी में कहा गया है कि मामले में अनुमानित अपराध की आय लगभग 400 करोड़ रुपये है। हालांकि जांच के दौरान यह पाया गया कि इन इकाइयों द्वारा विभिन्न सेल कंपनियां खोलकर 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया।
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