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ED: यूनिटेक संस्थापक रमेश चंद्रा, बहू प्रीति चंद्रा के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई

Mon, 06 Dec 2021 09:49 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ईडी ने आरोप लगाया है कि यूनिटेक समूह पर 347.5 करोड़ रुपये कार्नोस्टी समूह के खातों में स्थानांतरित किये। इस पैसे कार्नोस्टी समूह ने एनसीआर समेत देशभर, विदेश में चल व अचल संपत्ति खरीदी।
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प्रवर्तन निदेशालय - फोटो : social media
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विस्तार
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प्रवर्तन निदेशालय ने यूनिटेक समूह के संस्थापक रमेश चंद्रा, उनकी बहू व संजय चंद्रा की पत्नी प्रीति चंद्रा व कार्नोस्टी समूह के राजेश मलिक के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप पत्र दाखिल किया है। तीनों को ईडी ने 4 अक्तूबर को गिरफ्तार किया था। ईडी के अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा के समक्ष पिछले हफ्ते यह आरोपपत्र दाखिल किया गया।

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ईडी ने आरोप लगाया है कि यूनिटेक समूह पर 347.5 करोड़ रुपये कार्नोस्टी समूह के खातों में स्थानांतरित किये। इस पैसे कार्नोस्टी समूह ने एनसीआर समेत देशभर, विदेश में चल व अचल संपत्ति खरीदी। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ईडी को संजय चंद्रा व उनके भाई अजय चंद्रा से जेल में पूछताछ करने की अनुमति दे दी है। इससे पहले प्रीति चंद्रा के वकील प्रमोद दुबे ने कोर्ट को बताया था कि प्रीति जांच में सहयोग कर रही हैं और उनके खिलाफ ईडी को कोई आपत्तिजनक साक्ष्य नहीं मिला है। हाल ही में ईडी ने यूनिटेक के पूर्व प्रवर्तकों अजय चंद्रा व संजय चंद्रा की 18.14 करोड़ रुपये की दो बेनामी कंपनियां अटैच की हैं।

सूरत की लॉजिस्टिक कंपनी व निदेशकों के खिलाफ मामला दर्ज
इस बीच सीबीआई ने सूरत स्थित सिद्धि विनायक लॉजिस्टिक लिमिटेड और उसके निदेशकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन पर भारतीय स्टेट बैंक के साथ 214 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने का आरोप है। आरोप है कि वे नए वाणिज्यिक वाहनों के वास्ते लिए गए ऋण का भुगतान नहीं कर पाए। अधिकारियों ने बताया कि मामला दर्ज करने के बाद सीबीआई ने सूरत और मुंबई में निदेशकों के आवासीय और कार्यालय परिसरों की तलाशी ली।
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आयकर ने कोलकाता के समूह की 100 करोड़ की काली कमाई पकड़ी 
आयकर विभाग ने निर्माण सामग्री बनाने वाले कोलकाता के एक समूह की 100 करोड़ रुपये की काली कमाई पकड़ी है। केेंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने सोमवार को बताया कि आयकर अधिकारियों ने 1 दिसंबर को इस समूह के पश्चिम बंगाल व ओडिशा में 20 ठिकानों पर छापे मारे और दस्तावेज व डिजिटल डाटा के रूप में साक्ष्य जब्त किये हैं। इन साक्ष्यों से भारी मात्रा में किये गए अघोषित नकद भुगतान का पता चला है। 

आयकर टीमों ने जांच में पाया कि इस समूह ने कर चोरी के लिए मोटी काली कमाई को कई मुखौटा कंपनियों के जरिये फर्जी भुगतान के रूप में दिखाया। समूह के बही खातों में इस रकम को शेयर में फंसे पैसे या असुरक्षित कर्ज के रूप में दिखाया गया। समूह के जुड़े एक प्रमुख व्यक्ति ने खुद फर्जीवाड़े की इस मोडस ऑपरेंडी को स्वीकार भी किया। आयकर टीमों ने छापों के दौरान 75 लाख नकद, 2.26 करोड़ के गहने जब्त किये व कुछ बैंक लॉकर सीज किये हैं। आयकर की जांच जारी है।

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