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West Bengal: हाईकोर्ट में ईडी की अपील- CM ममता और शीर्ष पुलिस अफसरों के खिलाफ CBI जांच हो; अदालत में हंगामा भी

Fri, 09 Jan 2026 03:30 PM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

ईडी ने I-PAC छापेमारी में बाधा डालने और सबूत ले जाने के आरोप में ममता बनर्जी के खिलाफ हाई कोर्ट में सीबीआई जांच की मांग की है। एजेंसी ने 20 करोड़ के हवाला लेनदेन का दावा किया। वहीं, टीएमसी ने इसे बदले की कार्रवाई बताते हुए जवाबी याचिका दायर की है।
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चुनाव आयोग पर बरसीं सीएम ममता बनर्जी - फोटो : ANI
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विस्तार
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जांच की मांग करते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ईडी का आरोप है कि कोलकाता में राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC और उसके निदेशक के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान राज्य मशीनरी ने बाधा डाली और सर्च ऑपरेशन को पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया। वहीं मामले में टीएमसी ने इसे बदले की कार्रवाई बताते हुए ईडी के खिलाफ याचिका दायर की है। फिलहाल हाई कोर्ट ने इस संबंध में दायर याचिकाओं पर सुनवाई 14 जनवरी तक के लिए टाल दी है।
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ईडी ने क्या कहा?
ईडी ने अपनी याचिका में दावा किया है कि इस घटना में राज्य के सर्वोच्च राजनीतिक नेतृत्व की सीधी भागीदारी थी और पुलिस बल का दुरुपयोग किया गया। एजेंसी ने अदालत से आग्रह किया है कि वह सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने और मुख्यमंत्री सहित सभी संलिप्त व्यक्तियों की भूमिका की जांच करने का निर्देश दे। एजेंसी ने कहा कि सीबीआई की जांच जरूरी है, क्योंकि कलकत्ता हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने लगातार यह माना है कि जहां राज्य में ऊंचे और शक्तिशाली लोग संज्ञेय अपराधों को करने में शामिल होते हैं, वहां जांच सीबीआई को ट्रांसफर कर दी जानी चाहिए।

ईडी ने सर्च वाली जगहों से अवैध रूप से और जबरदस्ती ले जाए गए सभी डिजिटल उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, स्टोरेज मीडिया और दस्तावेजों को तत्काल जब्त करने, सील करने, फोरेंसिक संरक्षण और ईडी की कानूनी हिरासत में वापस करने की भी मांग की है।
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क्या है मामला?
ईडी ने गुरुवार को कथित कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में I-PAC के सॉल्ट लेक ऑफिस और इसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की थी। एजेंसी का आरोप है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पुलिस की मदद से जैन के आवास में जबरन घुस गईं और अधिकारियों के मना करने के बावजूद अहम डिजिटल सबूत और दस्तावेज अपने साथ ले गईं। ईडी के मुताबिक, इस कारण तलाशी अभियान विफल हो गया और कोई जब्ती नहीं हो सकी।

ईडी ने लगाया आरोप
याचिका में दावा किया गया है कि कोयला चोरी से मिले लगभग 20 करोड़ रुपये हवाला के जरिए I-PAC तक पहुंचे। यह फर्म 2021 से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और राज्य सरकार को सलाह दे रही है। ईडी का कहना है कि यह पैसा मुंबई की एक 'अंगड़िया' फर्म के जरिए ट्रांसफर किया गया था, जिसका नाम दिल्ली शराब घोटाले की जांच में भी सामने आया था। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि प्रतीक जैन ने गोवा चुनाव में I-PAC का काम संभाला था, जहां कथित तौर पर दिल्ली शराब घोटाले के पैसे का इस्तेमाल हुआ था।

ईडी ने अदालत से मांग की है कि जब्त किए गए सभी डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों को तुरंत उसकी हिरासत में वापस किया जाए और उनके साथ छेड़छाड़ पर रोक लगाई जाए। हाई कोर्ट में इस याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई होने की उम्मीद है।

टीएमसी ने भी दायर की याचिका
वहीं इस मामले को लेकर टीएमसी ने I-PAC पर ईडी की छापेमारी के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। टीएमसी की याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता टीएमसी बंगाल में एसआईआर के खिलाफ आवाज उठा रही है और विरोध कर रही है। इसलिए ईडी टीएमसी के पॉलिटिकल स्ट्रैटेजी ऑफिस (I-PAC) और को-फाउंडर के घर पर तलाशी और जब्ती कर रही है। टीएमसी की याचिका में यह भी कहा गया है कि एजेंसी ईडी ने गैर-कानूनी तरीके से गोपनीय डेटा जब्त किया है।
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