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Union Budget: बजट से पहले कल पेश होगा आर्थिक सर्वेक्षण-2024, जानें क्या है इसका महत्व और इतिहास

Sun, 21 Jul 2024 07:49 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

Union Budget: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 23 जुलाई को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश करेंगी। वहीं इससे पहले केंद्र सरकार सोमवार को आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेगी। वित्त मंत्री के तौर पर निर्मला सीतारमण रिकॉर्ड सातवीं बार बजट पेश करेंगी।
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बजट से पहले कल पेश होगा आर्थिक सर्वेक्षण-2024 - फोटो : ANI
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विस्तार
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2024-25 के पूर्ण बजट का इंतजार लगभग खत्म हो गया है क्योंकि केंद्र सरकार सोमवार को आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेगी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश होने से एक दिन पहले संसद में बजट-पूर्व दस्तावेज पेश करेंगी। वहीं संसद के मानसून सत्र के साथ अपना सातवां केंद्रीय बजट पेश करने के साथ ही निर्मला सीतारमण लगातार सात केंद्रीय बजट पेश करने वाली देश की पहली वित्त मंत्री बन जाएंगी। इससे पहले मोरारजी देसाई ने छह केंद्रीय बजट पेश किया था। जिन्होंने वित्त मंत्री के रूप में 1959 और 1964 के बीच पांच वार्षिक बजट और एक अंतरिम बजट पेश किया था। निर्मलासीतारमण ने मनमोहन सिंह, अरुण जेटली, पी. चिदंबरम और यशवंत सिन्हा को पीछे छोड़ दिया है, जिन्होंने पांच-पांच बजट पेश किए थे।
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आर्थिक सर्वेक्षण दस्तावेज, अर्थव्यवस्था की स्थिति और 2023-24 (अप्रैल-मार्च) के कई संकेतकों और चालू वर्ष के लिए कुछ दृष्टिकोण के बारे में जानकारी देगा। सोमवार को पेश किया जाने वाला आर्थिक सर्वेक्षण दस्तावेज मंगलवार को पेश किए जाने वाले 2024-25 के वास्तविक बजट के स्वर और बनावट के बारे में भी कुछ जानकारी दे सकता है। जिसे वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के विभाग के आर्थिक प्रभाग की तरफ से और मुख्य आर्थिक सलाहकार की देखरेख में तैयार किया गया है।

क्या होता है आर्थिक सर्वेक्षण?
यह वार्षिक वित्तीय विवरण से पहले साल में एक बार प्रस्तुत किया जाने वाला एक विस्तृत दस्तावेज है। इस दस्तावेज में केंद्र सरकार के सभी महत्वपूर्ण विकासात्मक कार्यक्रम शामिल हैं। यह केंद्र सरकार की नीतिगत पहलों पर भी प्रकाश डालता है। जानकारी के मुताबिक पहला आर्थिक सर्वेक्षण 1950-51 में अस्तित्व में आया था, तब यह बजट दस्तावेजों का हिस्सा हुआ करता था। 1960 के दशक में, इसे बजट दस्तावेजों से अलग कर दिया गया और केंद्रीय बजट से एक दिन पहले पेश किया गया।

आर्थिक सर्वेक्षण की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता जिस पर कई लोगों की नजर होगी, वो इसका केंद्रीय विषय है। बता दें कि साल 2022 में, केंद्रीय विषय 'एजाइल अप्रोच' था, जिसमें कोविड-19 महामारी के झटके के लिए भारत की आर्थिक प्रतिक्रिया पर जोर दिया गया था। 2023 में, यह 'रिकवरी पूरी' था, जब अर्थव्यवस्था ने महामारी से प्रेरित संकुचन, रूसी-यूक्रेन संघर्ष और मुद्रास्फीति से व्यापक आधार पर रिकवरी की और महामारी-पूर्व विकास पथ पर चढ़ गई।

बजट से पहले क्यों होती है हलवा समारोह?
बजट पेश होने से पहले एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम 'हलवा समारोह' होता है। बजट पेश होने से कुछ दिन पहले, सरकार में 'हलवा समारोह' आयोजित करने की परंपरा है, जो बजट दस्तावेज छपाई की शुरुआत का प्रतीक है। इस साल, 2024-25 के पूर्ण बजट के लिए बजट तैयारी प्रक्रिया के अंतिम चरण को चिह्नित करते हुए, हलवा समारोह 16 जुलाई को वित्त मंत्री सीतारमण, राज्य मंत्री पंकज चौधरी और सचिवों की उपस्थिति में नॉर्थ ब्लॉक में आयोजित किया गया था। इस अवसर पर बजट तैयारी और संकलन प्रक्रिया में शामिल अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद थे। हलवा समारोह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वित्त मंत्रालय में तालाबंदी की शुरुआत का भी प्रतीक है, जिसका अर्थ है कि किसी भी अधिकारी को मंत्रालय परिसर से बाहर जाने की अनुमति नहीं है। संसद में वित्तीय दस्तावेज पेश किए जाने के बाद ही बजट टीम के सभी लोगों को बाहर जाने की अनुमति है। नॉर्थ ब्लॉक में स्थित बेसमेंट के अंदर केंद्रीय बजट की छपाई 1980 से एक स्थायी विशेषता रही है।

आर्थिक सर्वेक्षण का महत्व क्या है?
आर्थिक सर्वेक्षण का महत्व यह है कि यह देश की आर्थिक स्थिति को दिखाता है। आर्थिक सर्वेक्षण पैसे की आपूर्ति, बुनियादी ढांचे, कृषि और औद्योगिक उत्पादन, रोजगार, कीमतों, निर्यात, आयात, विदेशी मुद्रा भंडार के साथ-साथ अन्य प्रांसगिक आर्तिक कारकों का विश्लेषण करता है। यह दस्तावेज सरकार का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, जो अर्थव्यवस्था की प्रमुख चिंताओं पर भी ध्यान केंद्रित करता है। आर्थिक सर्वेक्षण का डाटा और विश्लेषण आमतौर पर केंद्रीय बजट के लिए एक नीतिगत दृष्टिकोण प्रदान करता है। 

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क्या है अर्थव्यवस्था की स्थिति?
भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी नवीनतम मौद्रिक नीति बैठक में चालू वर्ष 2024-25 के लिए सकल घरेलू उत्पाद का पूर्वानुमान 7 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया है। घरेलू मांग की मजबूती ने पिछले कुछ सालों में अर्थव्यवस्था को 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर पर पहुंचा दिया है। वहीं अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने अपने नवीनतम पूर्वानुमान में 2024 के लिए भारत के विकास अनुमानों को पहले के 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है, जिससे देश उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश बना हुआ है। आईएमएफ ने पहले 2024 के लिए 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान लगाया था, जिसे संशोधित कर 6.8 प्रतिशत और अब 7 प्रतिशत कर दिया है। भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
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