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आप नहीं पीते तब भी खतरनाक है ई-सिगरेट, जानिए आखिर ऐसा क्यों..?

Thu, 19 Sep 2019 03:17 AM IST
संदीप भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • ई सिगरेट पर प्रतिबंध के बाद करीब 800 करोड़ रुपये का व्यापार होगा प्रभावित
  • चीन, जापान, कोरिया और दुबई से सीधे भारत पहुंच रही हैं ई सिगरेट
  • अकेले दिल्ली में ही ई सिगरेट का करीब 120 करोड़ रुपये का है कारोबार
  • 16 राज्य पहले ही प्रतिबंध लगा चुके हैं ई सिगरेट पर, दिल्ली में नहीं
  • दिसंबर 2017 में राज्यसभा के पहले दिन उपराष्ट्रपति ने किए थे सवाल
  • एम्स और टाटा रिर्सच ने की थी प्रतिबंध की अनुशंसा
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विस्तार
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क्या होती है ई-सिगरेट

इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट या ई-सिगरेट एक बैटरी युक्त उपकरण है, जो निकोटिन वाले घोल को गर्म कर एयरोसोल पैदा करता है। इसके चलते जब कश लगाते हैं तो हीटिंग डिवाइस इसे गर्म करके भाप में बदल देती है। इसलिए इसे स्मोकिंग नहीं वेपिंग कहते हैं। इसका सीधे तौर पर छाती और मस्तिष्क पर बुरा असर पड़ता है। विकसित देशों में विशेषकर युवाओं और बच्चों में इसने एक महामारी का रूप ले लिया है।

1500 करोड़ रुपये का ब्लैक मार्केट है ई सिगरेट का

लंबे समय से ई सिगरेट पर काम कर रहे स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ निदेशक ने इसके हर छोटे बड़े पहलू पर अमर उजाला से बातचीत की। इनके अनुसार करीब 460 ई सिगरेट की कंपनियां देश में एक्टिव हैं। इनके करीब 7 हजार से ज्यादा फ्लैवर उत्पाद बाजारों में बिक रहे हैं जिनका कारोबार करीब 800 करोड़ रुपये के आसपास है, लेकिन इसका ब्लैक मार्केट करीब दोगुना यानि 1500 करोड़ रुपये का है। चीन, कोरिया, जापान और दुबई जैसे देशों से सीधे मुंबई, दिल्ली व गुजरात के रास्ते ई सिगरेट के उत्पादों को बाजारों तक लाया जा रहा है। चूंकि अभी तक कानून नहीं था, इसलिए दुकानों पर खुलेआम इसकी बिक्री होती थी। स्कूली बच्चों से लेकर 20 से 25 वर्ष तक की आयु के युवा अक्सर ई सिगरेट के साथ दिखते भी हैं।

दो साल से निजी कंपनियों का दबाव झेल रही सरकार

दो साल से केंद्र सरकार ई सिगरेट से जुड़ी नामचीन कंपनियों का दबाव भी झेल रही है। कई कंपनियों की ओर से अलग अलग राज्यों के हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं। इतना ही नहीं अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) सहित देश के कई बड़े अस्पतालों के डॉक्टरों से भी ई सिगरेट की पैरवी करा चुके हैं। इतना ही नहीं दबाव बनाने के लिए निजी कंपनियां कई विदेशी रिसर्च तक सरकार के समक्ष रख चुकी हैं। अब तक ये कंपनियां चाहती थीं कि सरकार प्रतिबंध न लगाकर इनके नियमन पर काम करे। ताकि बाकी बीड़ी सिगरेट की तरह ई सिगरेट भी भारत में सख्त नियमों के साथ बिक्री हो सके। हालांकि एक सच ये भी है कि ई सिगरेट के दुष्प्रभावों को लेकर अब तक भारत के पास कोई भी सटीक अध्ययन नहीं है।

 

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कैसे काम करती है ई-सिगरेट, क्यों लगाई जा रही है रोक

कैसे काम करती है ई-सिगरेट

बात करे ई-सिगरेट की तो यह एक ऐसी डिवाइस है जो बैटरी चार्ज करने पर काम करती है। इसमें  निकोटिन और हानिकारक रसायन तरल रूप में एक रिफिल में होते हैं। जिन्हें डिवाइस में फिट किया जाता है।  इसके चलते जब कश लगाते हैं तो हीटिंग डिवाइस इसे गर्म करके भाप में बदल देती है।  इसलिए इसे स्मोकिंग नहीं वेपिंग कहते हैं।  इसका सीधे तौर पर छाती और मस्तिष्क पर  बुरा असर पड़ता है।  वित्तमंत्री ने बताया भारतीय खासतौर पर युवा और स्कूली बच्चे इस वेपिंग के कूल अंदाज की ओर तेजी से आकषत हो रहे हैं।

क्यों लगाई जा रही है रोक

सिगरेट पर रोक न लगाने की वजह केसवाल पर वित्तमंत्री ने कहा ई-सिगरेट पर केंद्र सरकार शुरुआती दौर में ही प्रतिबंध लगाने की पहल इसलिए कर रही है कि इस पर अभी रोक लगाना ज्यादा मुफिद है। इसके अलावा आखिल भारतीय आयुर्वेदिक अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर)और टाटा रिसर्च सेंटर के विशेषज्ञों ने भी इस पर शोध करके प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी।  इसलिए इस मामले पर बनी मंत्रियों के समूह ने इसे शुरुआती दौर में ही प्रतिबंधित करने की सिफारिश की।

स्टॉक करके रखी है तो पास के पुलिस स्टेशन में जाएं

अध्यादेश के साथ ही यदि किसी के पास ई-सिगरेट का स्टॉक है। इस्तेमाल करते हैं या फिर बिक्री करते हैं तो उन्हें निकटतम पुलिस स्टेशन जाकर इसकी घोषणा करके जमा कराना होगा। अध्यादेश में इस तरह के मामलों पर कार्रवाई के लिए पुलिस उपनिरीक्षक स्तर के अधिकारी को नामित किया गया है। राज्य सरकार इसके समकक्ष के अधिकारी को भी नामित कर सकती है।

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न्यूयॉर्क में फ्लेवर्ड ई-सिगरेट बैन, प्रतिबंध लगाने वाला दूसरा दूसरा राज्य बना न्यूयॉर्क

दुनियाभर में फ्लेवर्ड वाली ई-सिगरेट के बढ़ते चलने के बाद इसके नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए न्यूयॉर्क सिटी में इस पर बैन लगा दिया गया है। न्यूयॉर्क ई-सिगरेट पर बैन लगाने वाला दूसरा स्टेट बना गया है। न्यूयॉर्क के डोमेस्टिक गवर्नर ने टीनएजर्स और यूथ के बीच इस सिगरेट से बढ़ रही फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों की बढ़ती संख्या पर चिंता जाहिर करते हुए इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। जिसके बाद इस पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया।

एंड्रयू क्वोमो के कार्यालय की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि पैनल ने ई सिगरेट पर बैन के लिए मतदान के बाद मेन्थॉल के अलावा सभी फ्लेवर्ड ई-सिगरेट पर लागू कर दिया है। इस नियम के बाद ई-सिगरेट बेचने वाले रिटेलर्स को दो सप्ताह का समय दिया गया है।

यूनाइटेड स्टेड में मिशिगन के बाद न्यूयॉर्क सिटी दूसरा ऐसा राज्य बन चुका है, जहां फ्लेवर्ड ई-सिगरेट पर बैन लगाया जा चुका है। बैन के निर्णय के बाद एंड्रयू क्वोमो ने कहा कि इस बात में कोई संदेह नहीं है कि ई-सिगरेट उपलब्ध कराने वाली कंपननियां जानबूझकर बबलगम, कैप्टन क्रंच और कॉटन कैंडी जैसे फ्लेवर का उपयोग कर रही हैं ताकि युवाओं को इसकी ओर आकर्षित किया जा सके। यह एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का विषय है और आज यह समाप्त होता है।
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