भारत ने शुक्रवार को देश में विकसित लॉन्ग रेंज बम का सफल परीक्षण किया। डीआरडीओ द्वारा विकसित इस बम को भारतीय वायुसेना (आईएएफ) की तरफ से एक एरियल प्लेटफॉर्म के जरिए टेस्ट किया गया। जानकारी के मुताबिक, इस बम को एक फाइटर एयरक्राफ्ट से गिराया गया था और इसे जमीन में लंबी दूरी पर आधारित टारगेट तक गाइड कर के निशाने तक पहुंचाया गया। डीआरडीओ के मुताबिक, इस बम का निशाना एक सीमा तक अचूक है।
पोखरण में स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन का सफल परीक्षण
उधर, राजस्थान की पोखरण रेंज में 28 अक्तूबर को स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन का सफल परीक्षण किया गया। सरकारी अधिकारियों ने बताया कि आने वाले समय में सटीक निर्देशित हथियारों के और परीक्षण किए जाने की उम्मीद है।
क्या हैं लॉन्ग रेंज गाइडेड बम, साधारण बम से अलग कैसे?
जहां साधारण बम को गिराने के बाद उन्हें नियंत्रित नहीं किया जा सकता, वहीं लॉन्ग रेंज गाइडेड बम, जिन्हें स्मार्ट बम भी कहा जाता है उन्हें गिराने के बाद उनकी दिशा और गति को बदला जा सकता है। इससे यह बम अचूक हो जाते हैं और दुश्मन के ठिकानों को नष्ट करने में खतरनाक साबित होते हैं।
जानिए किस तरह से नियंत्रित किए जाते हैं गाइडेड बम?
एक स्मार्ट बम को साधारण बम से अलग तरह से डिजाइन किया जाता है। इनमें अलग से पर और पंख दिए जाते हैं, जिससे इनकी दिशा को नियंत्रित किया जाता है। इनके सिर्फ कुछ कोणों को बदलकर ही इनके लक्ष्य को बदला जा सकता है। यानी यह बम मुख्य तौर पर सीधे गिरने की जगह ग्लाइड करते हुए गिरते हैं और टारगेट को खत्म कर देते हैं।