डीआरडीओ के अध्यक्ष जी सतीश रेड्डी
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डॉ. रेड्डी ने देश की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने और विज्ञान व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कलाम के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि कलाम को भारत के मिसाइल मैन के नाम से जाना जाता था। उनके नेतृत्व में पांच मिसाइलें (अग्नि, आकाश, नाग, पृथ्वी और त्रिशूल) विकसित की गईं। इसके साथ ही उन्होंने 'मेक इन इंडिया' पहल की भी सराहना की और कहा कि इस पहल ने प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत को आत्मस्थिर बनानेने में मदद की है।
अपने भाषण के दौरान डीआरडीओ प्रमुख डॉ. सतीश रेड्डी ने कि रक्षा क्षेत्र में देश की सफलताओं और विभिन्न पहलों का जिक्र किया। उन्होंने ऐसी आत्मनिर्भर देश बनने के लिए ऐसी प्रौद्योगिकी का निर्यात बढ़ाने और आयात को कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके साथ ही डॉ. रेड्डी ने दो डीआरडीओ की दो प्रयोगशालाओं के बीच क्वांटम संचार पर जोर दिया, जो जरूरत के समय में सुरक्षित और सुरक्षित संचार प्रदर्शित करता है।
उन्होंने 'विकास सह उत्पादन पार्टनर' प्रोग्राम का उल्लेख किया। यह प्रोग्राम डीआरडीओ ने शुरू किया है जो निजी क्षेत्र को मिसाइल विकसित करने और उनका उत्पादन करने की अनुमति देता है। उन्होंने कहा कि देश में रक्षा उत्पादन की प्रक्रिया को रफ्तार देने के लिए डीआरडीओ की नई नीति के तहत उद्यमियों को प्रौद्योगिकी और पेटेंट (लाइफ साइंस और मिसाइल प्रौद्योगिकी समेत) का हस्तांतरण बिल्कुल मुफ्त में किया जा रहा है।
डीआरडीओ प्रमुख डॉ. रेड्डी ने कहा कि इसने रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर एक एमटेक प्रोग्राम भी शुरू किया है। इस प्रोग्राम के छात्र-छात्राओं को डीआरडीओ की विभिन्न इंटर्नशिप के तहत मौके दिए जा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के माध्यम से आर एंड डी (शोध एवं विकास) को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई योजना की शुरुआत भी बहुत जल्द की जाने वाली है।