अयोध्या के राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह को द्रमुक सांसद टीआर बालू ने राजनीतिक कार्यक्रम बताया है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए जनता से किए वादे को पूरा न करने का भी आरोप लगाया है।
द्रमुक सांसद टीआर बालू ने कहा, 'राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि राजनीतिक कार्यक्रम है। 2014 से ही सत्ता में आने के बाद भाजपा ने अपना एक भी वादा पूरा नहीं किया है। अपनी असफलताओं को छिपाने और लोगों का ध्यान भटकाने के लिए वे राम मंदिर को अपनी उपलब्धि के तौर पर दिखा रहे हैं।'
उन्होंने आगे कहा, 'द्रमुक को भारतीय संविधान पर पूरा भरोसा है। यह धर्मनिर्पेक्षता के बारे में बताता है। द्रमुक कभी भी अपने फायदे के लिए धर्म को राजनीति के साथ नहीं जोड़ती है। राजनीतिक कारणों से और वोट बैंक के लिए भक्ति का दिखावा करना भारत के संप्रभुता और संविधान के खिलाफ है।'
तमिलनाडु की राज्यपाल ने किया पलटवार
टीआर बालू के इस बयान पर तमिलनाडु की राज्यपाल तमिलिसाई सौंदर्यराजन ने पलटवार किया है। उन्होंने पूछा, 'इसे कौन राजनीतिक बना रहा है? जो प्राण प्रतिष्ठा में उपस्थित होने वाले हैं वो या जो नहीं होने वाले हैं वो? वे क्यों नहीं इस समारोह में उपस्थित हो रहे हैं? क्योंकि उन्हें लगता है कि यह राजनीतिक समारोह है। आमंत्रण के बाद भी वह नहीं आ रहे हैं, क्योंकि यह भगवान का त्योहार है। यह प्रत्येक व्यक्ति का वर्षो पुराना सपना है।'
उन्होंने आगे कहा, 'जैसा कि मैंने कहा, सभी तमिल राजाओं और महाराजाओं ने मंदिर बनाए। भले ही मंदिर पुजारियों द्वारा बनाया गया था, लेकिन वो राजा ही थे जिन्होंने त्योहारों को आगे रखा। कुम्भाभिषेकम की शुरुआत उनके द्वारा ही की गई थी। जब तमिल संस्कृति ही ऐसी है, तो वे इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के शामिल होने पर आपत्ति क्यों जता रहे हैं? यह उनके द्वारा राजनीतिकरण है।'
बता दें कि 22 जनवरी को अयोध्या के राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन किया गया है। 500 साल के इंतजार के बाद रामलला अपने महल में विराजित होंगे। इसे लेकर हर तरफ खुशी का माहौल है। हर राम भक्त को इस दिन का बेसब्री से इंतजार था। हालांकि, कई विपक्षी नेताओं ने इस समारोह में शामिल होने से इनकार कर दिया है।