शिवसेना (यूबीटी) नेता अजय चौधरी ने सोमवार को बंबई उच्च न्यायालय को बताया कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट के मुख्य सचेतक भरत गोगावले की ओर से दायर याचिका केवल देरी कराने की रणनीति है। याचिका में विपक्षी दल के विधायकों को अयोग्य न ठहराने के महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती दी गई है। चौधरी ने दावा किया कि गोगावले ने देरी की रणनीति अपनाने के लिए याचिका दायर की।
गोगावले ने इस साल जनवरी में याचिका दायर की। याचिका के जवाब में विपक्षी पार्टी के विधायक चौधरी ने सोमवार को वसीम सरोदे के जरिए एक हलफनामा दायर किया। शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के मुख्य सचेतक गोगोवले ने याचिका में विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के दस जनवरी के आदेश की वैधता, औचित्य और शुद्धता को चुनौती दी है। इस फैसले में शिवसेना (यूबीटी) के विधायकों के खिलाफ उनकी ओर से दायर अयोग्यता याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था।
उन्होंने विधासभा अध्यक्ष के आदेश को कानून के अनुसार गलत घोषित करने, उसे रद्द करने और शिवसेना (यूबीटी) के सभी 14 विधायकों को विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित करने का अनुरोध किया है। उच्च न्यायाय ने तब सभी 14 विधायकों और नार्वेकर को भी नोटिस जारी किया था और उन्हें अपने हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया था। विधायकों में से एक चौधरी ने हलफनामे में कहा कि गोगावल की याचिका विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ शिवसेना की ओर से सर्वोच्च न्यायायलय में दायर याचिकाओं की सुनवाई में देरी करने की रणनीति है।
उन्होंने कहा, याचिका भ्रम पैदा करने और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विचार किए जा रहे मामलों में देरी करने के मकसद से दायर की गई है। दायर याचिका झूठी और महत्वहीन है और खारिज होने लायक है। चौधरी ने आगे दावा किया कि राकांपा (शरदचंद्र पवार) विधायकों को अयोग्य ठहराने से जुड़ी उप मुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा की याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वह सभी अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला करेगा। जिसमें शिवसेना खेमे से जुड़ी याचिकाएं भी शामिल हैं।