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20 लाख केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के परिवारों के साथ भेदभाव! सेना की तरह उनकी कैंटीन को नहीं मिलती जीएसटी में छूट

Mon, 11 Jan 2021 06:31 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सामान्य स्थिति में अर्धसैनिक बलों को आर्मी कैंटीन में प्रवेश की इजाजत नहीं है। केवल उन्हीं क्षेत्रों में जहां केंद्रीय अर्धसैनिक बल, आर्मी की कमांड या उनके साथ ड्यूटी देते हैं, इन बलों को सीएसडी कैंटीन की सुविधा दे दी जाती है...
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CAPF Canteen - फोटो : Amar Ujala (File)
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केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के लिए शुरू की गई सेंट्रल पुलिस कैंटीन (सीपीसी) के साथ जो भेदभाव हो रहा है, उसे लेकर इन बलों के करीब 20 लाख परिवारों में गुस्सा है। सेना की कैंटीन यानी सीएसडी (कैंटीन स्टोर्स डिपार्टमेंट) को जीएसटी से छूट दी गई है, जबकि सीपीसी कैंटीन पर जीएसटी लगता है। इसका नुकसान यह है कि सीपीसी कैंटीन से जो सामान मिलता है, उसकी कीमत बाजार भाव के आसपास पहुंच जाती है।

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दूसरी तरफ सीएसडी कैंटीन से खरीदे जाने वाला सामान बाजार भाव के मुकाबले काफी सस्ता रहता है। कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से पूछा है कि अर्धसैनिक बलों के परिजनों के साथ ये छलावा क्यों किया जा रहा है। एसोसिएशन ने मांग की है कि इन बलों को प्रोत्साहित करने के लिए तुरंत प्रभाव से सीपीसी कैंटीन में जीएसटी पर छूट दी जाए।

बता दें कि गत शुक्रवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सीएसडी कैंटीन के महंगे सामान जैसे माइक्रोवेव ऑवन, फ्रिज, वाशिंग मशीन, टीवी, मोबाइल फोन, लैपटॉप व एयर कंडीशनर आदि की ऑनलाइन बिक्री व्यवस्था शुरू की है। सिंह ने अपने ट्विटर अकाउंट पर जानकारी देते हुए लिखा था कि इस पोर्टल के माध्यम से 45 लाख सीएसडी लाभार्थी अपने घर बैठे ही एएफडी-1 श्रेणी के उत्पाद खरीद सकेंगे।
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सशस्त्र बलों के अफसर और सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी इन सीएसडी कैंटीनों का इस्तेमाल करते हैं। यहां उल्लेख करना जरूरी है कि सामान्य स्थिति में अर्धसैनिक बलों को आर्मी कैंटीन में प्रवेश की इजाजत नहीं है। केवल उन्हीं क्षेत्रों में जहां केंद्रीय अर्धसैनिक बल, आर्मी की कमांड या उनके साथ ड्यूटी देते हैं, इन बलों को सीएसडी कैंटीन की सुविधा दे दी जाती है। हालांकि यह व्यवस्था केवल पांच-सात फीसदी ड्यूटी एरिया में देखने को मिलती है। वहां भी सामान मिलने में सैन्य जवानों को प्राथमिकता दी जाती है। बाकी जगहों पर सीपीसी की अपनी 1600 कैंटीन खोली गई हैं।

कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह का कहना है कि जब देशभर में अर्धसैनिक बलों की 1600 सेंट्रल पुलिस कैंटीन (सीपीसी) हैं तो वहां इस तरह के विशेष पोर्टल की शुरुआत क्यों नहीं की गई। रक्षा मंत्री द्वारा सीएसडी बैठक में सुरक्षा बलों के महानिदेशकों को न बुलाया जाना भी संदेह पैदा है। पैरामिलिट्री सरहदी जवानों को पहले से ही सेना की सीएसडी कैंटीन से किसी भी प्रकार का समान लेने से प्रतिबंधित किया गया है।

वैसे भी सीपीसी कैंटीन, जीएसटी के चलते बाजार भाव पर आ गई हैं। एसोसिएशन ने राजनाथ सिंह के गृह मंत्री के कार्यकाल के दौरान सीपीसी कैंटीन पर जीएसटी की छूट के लिए 29 जून 2017 को तत्कालीन वित्त मंत्री अरूण जेटली को पत्र लिखा गया था। उसके बाद भी इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया।

प्रधानमंत्री मोदी की स्वदेशी मुहिम के चलते सीपीसी कैंटीन का स्वदेशीकरण कर दिया गया। पूर्व अर्धसैनिकों ने 14 नवंबर 2019 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन, उसके बाद गृह मंत्री अमित शाह व गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय को भी तक सीपीसी कैंटीन से जीएसटी हटाने का आग्रह किया गया, मगर कुछ नहीं हो सका। एसोसिएशन की मांग है कि आगामी बजट सत्र में सीएसडी की तर्ज पर अर्धसैनिक बलों की सीपीसी कैंटीन पर 50 फीसदी जीएसटी छूट व कार, टीवी फ्रिज आदि खरीदने के लिए अलग से विशेष ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया जाए।

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