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Rajasthan: क्या अति उत्साह में अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार गए सचिन पायलट? पार्टी के भीतर ही तरह-तरह की चर्चाएं

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सचिन पायलट - फोटो : Amar Ujala Digital
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राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष जयपुर के शहीद स्मारक पर पांच घंटे का अनशन कार्यक्रम पूरा करके दिल्ली आ गए हैं। वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जमकर राजनीतिक पारी खेल रहे हैं। अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री के साथ जयपुर से दिल्ली के बीच में चलने वाली वंदे भारत ट्रेन का लोकार्पण करने के बाद प्रेसवार्ता भी की। हालांकि, इसमें किसी भी विवादित मुद्दे पर कुछ नहीं बोले। चतुराई भरी पारी खेली। इधर, दिल्ली में पायलट के अनशन पर बैठने को लेकर कांग्रेस पार्टी के भीतर ही तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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बुधवार 12 अप्रैल को ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी दिल्ली में थे। वह और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के घर पहुंचे। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी आए और 2024 के आम चुनाव के लिए विपक्षी दलों की एकता पर चर्चा हुई। इस दौरान राजस्थान के घटनाक्रम को लेकर राहुल गांधी के सचिवालय और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के सचिवालय में कई फोन घनघनाए। 

बताते हैं कि फिलहाल पूरा प्रकरण आलाकमान की नजर में है लेकिन फिलहाल इसपर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। अभी कांग्रेस पार्टी कोई स्पष्ट रूप से इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहती। दिल्ली में सचिन पायलट के समर्थकों और राहुल गांधी के करीबी नेताओं में अजय माकन भी हैं। माकन ने समय की धारा को देखकर मौन साध लिया है। कांग्रेस को छोड़कर अपनी भड़ास निकाल रहे गुलाम नबी आजाद जैसे नेता ऐसे मामलों में मुस्कराकर चुप हो जाते हैं। 
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उनके मुताबिक कांग्रेस पार्टी में अध्यक्ष भले बदल गया, लेकिन न तो कार्यशैली बदली है और न ही पार्टी के शिथिलता से भरे राजनीतिक मिजाज में कोई बदलाव आया है। राजस्थान की राजनीति में एक और सक्रिय परिवार है। उसका कहना है कि 2023 के विधानसभा चुनाव तक राजस्थान में कुछ बदलने के आसार नहीं है। पायलट अब एक निरर्थक कोशिश कर रहे हैं। उन्हें मान लेना चाहिए कि वह न तो ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं और न असम के हिमंत बिस्वा सरमा। उन्हें जल्दबाजी में दबाव की राजनीति का प्रयास नहीं करना चाहिए।

अशोक गहलोत की ताकत ही पायलट की कमजोरी है
राजस्थान में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सीपी जोशी खुद को राजनीति के किसी दमदार डिजाइनर से कम नहीं समझते। वह कभी राहुल गांधी की टीम के सदस्य माने जाते थे। इस समय टीम अशोक गहलोत का विश्वास हासिल है। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष हैं। सीपी जोशी की तरह ही राजस्थान के तमाम वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत की राजनीतिक शैली में खुद सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। गहलोत की निगाह भी प्रदेश में हर वर्ग के साथ-साथ पिछड़ा वर्ग पर खास रहती है। दूसरे गहलोत की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से अच्छी और कामकाजी ट्यूनिंग मानी जाती है। उन्होंने 2018 के विधानसभा चुनाव में पेंचीदगियों को ध्यान में रखकर अपने समर्थकों को चुनाव लड़वाया था। इस तरह से गहलोत द्वारा खड़ी की गई राजनीतिक डिजाइन का सचिन पायलट के पास कोई तोड़ भी नहीं है। पायलट ने जुलाई 2020 में भी एक ऐसा ही असफल कदम उठाया था। वह अपने समर्थक करीब 23 विधायकों के साथ मानेसर(गुड़गांव) में डट गए थे। हालांकि, बाद में इनमें से भी तीन विधायकों ने पायलट के मानमनौव्वल के पूरा होने के पहले ही वापसी कर ली थी।

क्या पायलट ने खुद पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है?
राजस्थान सरकार के एक मंत्री हैं। वह आफ द रिकार्ड दावा करते हैं कि 2023 तक सचिन पायलट को किसी बड़ी उम्मीद को छोड़ देना चाहिए। वह कहते हैं कि विधानसभा का चुनाव भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बिछाई चौसर पर ही होगा। झुंझुनू के एक अन्य कांग्रेस के नेता का कहना है कि सचिन पायलट अपनी ही सरकार के खिलाफ 5 घंटे तक अनशन पर बैठने का संदेश दिया। अनशन पर बैठे भी और बिना कोई संदेश दिए इसे समाप्त भी कर दिया। सचिन पायलट को खुद अपने फैसले पर सोचना चाहिए। 

सूत्र का कहना है कि मुझे कहने में संकोच होता है कि सचिन पायलट 2018 में उप मुख्यमंत्री बनने के बाद खुद को प्रदेश का मुख्यमंत्री ही समझते रहे। उन्हें अभी भी मुख्यमंत्री की कुर्सी के सिवा कुछ और नहीं दिखाई देता। सूत्र का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष खरगे और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को मैंने चिट्ठी लिखी है। सही बात तो यह है कि पायलट अपने साथ न तो युवा को कनेक्ट कर पा रहे हैं और न ही वह वरिष्ठ कांग्रेसियों में अपनी पकड़ बना पाए। जबकि अशोक गहलोत ने कभी इस अवसर को जाने ही नहीं दिया। मुख्यमंत्री के खिलाफ पायलट की नाराजगी के सिवा किसी और की नाराजगी भी सामने नहीं आ रही है। वह दिल्ली से लेकर जयपुर तक और पूरे राजस्थान में सक्रिय हैं। इसलिए मुझे नहीं लगता कि पायलट ने शहीद स्मारक पर अनशन कार्यक्रम करके कुछ अच्छा किया है।

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