'कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन' ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में 'आईपीएस' अधिकारियों के प्रतिनियुक्ति के जरिए 'कमांडेंट' पद पर आने का विरोध किया है। हालांकि अभी इसे लेकर नियमों में संशोधन करने की बात कही जा रही है। मौजूदा समय में आईपीएस अधिकारी, सीएपीएफ में प्रतिनियुक्ति पर डीआईजी, आईजी, एडीजी, एसडीजी व डीजी के पद पर आते हैं। इनमें भी डीआईजी आईपीएस के लिए स्वीकृत अधिकांश पद खाली पड़े रहते हैं। उन पदों को अस्थायी तौर पर कैडर अफसरों से भरना पड़ता है।
एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह का कहना है कि इससे कैडर अफसरों के कमांडेंट पद पर पदोन्नति के अवसर कम हो जाएंगे। बल मुख्यालय, सेक्टर हेडक्वार्टर या फ्रंटियर में सॉफ्ट पोस्टिंग लेकर आईपीएस अधिकारी, वहां की सुविधाओं का लाभ उठाएंगे। एसोसिएशन के पदाधिकारी के अनुसार, अभी तक सीआरपीएफ, बीएसएफ व दूसरे केंद्रीय सुरक्षा बलों में कैडर अधिकारी ही कमांडेंट का पद संभालते हैं। यदि इस पद के लिए आईपीएस, प्रतिनियुक्ति पर आएंगे, तो कमांडेंट व उससे निचले स्तर के कैडर अधिकारियों का मनोबल कम होगा। उनके आत्म सम्मान में कमी आएगी। मौजूदा समय में डीआईजी स्तर के 40 फीसदी पद आईपीएस अफसरों के लिए आरक्षित हैं। ये बात अलग है कि उनमें से अधिकांश पद खाली पड़े रहते हैं।
रणबीर सिंह ने कहा, आईपीएस को उनके प्रोबेशनरी पीरियड यानी ट्रेनिंग के बाद तीन साल के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में सहायक कमांडेंट के तौर पोस्टिंग दी जानी चाहिए। उन्हें मुख्यालय में तैनाती देने की बजाए, नक्सल प्रभावित इलाकों, उत्तर-पूर्व के उग्रवाद से ग्रस्त राज्य और एलओसी 'लाइन ऑफ कंट्रोल' यानी बॉर्डर आउट कंपनी पोस्ट पर लगाया जाए। 15 से 20 हजार फीट की ऊंचाई वाले इलाकों, जहां आईटीबीपी के हिमवीरों द्वारा बॉर्डर पर चौकसी की जाती है, वहां पोस्टिंग दी जाए। गुजरात में कच्छ का रण और राजस्थान के जैसलमेर व बाड़मेर से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात किया जाए। वहां पर आईपीएस को कंपनियों की कमान सौंपी जाए। इसका फायदा यह होगा कि आईपीएस अधिकारी को जवानों की दिनचर्या, ड्यूटी और वहां की कठिन परिस्थितियों से रूबरू होने का अवसर मिलेगा।
एसोसिएशन के मुताबिक, आईपीएस अधिकारी को केंद्रीय बलों में डीआईजी, आईजी या एडीजी स्तर पर तभी प्रवेश दिया जाना चाहिए, जब उसने अपने शुरुआती दौर में बतौर सहायक कमांडेंट, तीन साल तक केंद्रीय सुरक्षा बलों में कंपनी पोस्ट पर कमांड करने की महारत हासिल की हो। बता दें कि आईपीएस अधिकारी प्रेम राज डराल ने सीएपीएफ में 'कमांडेंट' पद पर ज्वाइन करने की इच्छा जाहिर की है। बीएसएफ डीजी ने पिछले दिनों इस प्रपोजल को आगे बढ़ाया है। इसके लिए सीएपीएफ के मौजूदा भर्ती नियमों 'आरआर' में संशोधन करने की बात कही जा रही है।
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में 'कमांडेंट' के पद पर आईपीएस को लगाने का चलन अब नहीं है। बीएसएफ और सीआरपीएफ में डीआईजी के पद से आईपीएस की प्रतिनियुक्ति शुरू होती है। आईपीएस और सीएपीएफ के कैडर अधिकारियों के बीच पदोन्नति को लेकर कई वर्ष तक विवाद चला है। इस बाबत दोनों पक्ष, सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचे हैं। इसके बावजूद सीएपीएफ के कैडर अधिकारी पदोन्नति में पिछड़ रहे हैं। आईपीएस अधिकारी कहते हैं कि अखिल भारतीय सेवा के मूलभूत सिद्धांतों के अनुरूप, हमें सीएपीएफ में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति मिलती है। यह प्रावधान सीएपीएफ के रिक्रूटमेंट नियमों में है।