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Collegium System: 'जजों की नियुक्ति प्रक्रिया लोकतांत्रिक नहीं', उपेंद्र कुशवाहा का कॉलेजियम व्यवस्था पर सवाल

Tue, 10 Sep 2024 05:06 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Collegium System: उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि न्यायपालिका में लोकतंत्र की कमी है और यह दुर्भाग्यपूर्ण है। हम एक लोकतंत्र हैं। लेकिन यह विडंबना है कि न्यायपालिका जैसी बड़ी संस्था में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए लोकतांत्रिक प्रणाली नहीं है।
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उपेंद्र कुशवाहा - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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राज्यसभा सदस्य उपेंद्र कुशवाहा ने मंगलवार को न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम प्रणाली की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था पिछड़ी जातियों के के लोगों को उच्च न्यायपालिका में शामिल होने से रोकती है। कुशवाहा ने यह भी कहा कि न्यायपालिका में लोकतंत्र की कमी है और वे संसद में इस मुद्दे को उठाएंगे। 

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राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता कुशवाहा बिहार से राज्यसभा सदस्य हैं। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि अनुसूचित जातियों (एससी) के उप-वर्गीकरण में कोई समस्या नहीं है। लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के  भीतर क्रीमी लेयर की कोई अवधारणा नहीं होनी चाहिए। 

कुशवाहा ने कहा, "न्यायपालिका में लोकतंत्र की कमी है और यह दुर्भाग्यपूर्ण है। हम एक लोकतंत्र हैं। लेकिन यह विडंबना है कि न्यायपालिका जैसी बड़ी संस्था में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए लोकतांत्रिक प्रणाली नहीं है।" 
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कुशवाहा ने आरोप लगाया कि आमतौर वे लोग जो प्रभावशाली होते हैं, उन्हें ही न्यायाधीश नियुक्त किया जाता है। जबकि दलित और पिछड़ी जातियों से शायद ही कोई लोग न्यायाधीश बन पाते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) अधिनियम का भी जिक्र किया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने असंविधानिक करार दिया था। 

उन्होंने कहा, "हम इस मुद्दे को संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह उठाएंगे। हम लोगों को इस मुद्दे के बारे में जागरूक करेंगे।" एनजेएसी अधिनियम को नरेंद्र मोदी सरकार ने 2014 में लागू किया था। यह अधिनियम न्यायिक नियुक्तियों को लेकर जिम्मेदार था और इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई), सुप्रीम कोर्ट के दो वरिष्ठ न्यायाधीश, कानून मंत्री और दो अन्य प्रमुख व्यक्ति शामिल थे, जिन्हें सीजेआई, प्रधानमंत्री और लोकसभा में विफक्ष के नेता द्वारा नामित किया गया था। हालांकि, अक्तूबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून को 'असंविधानिक' घोषित कर दिया था।



अनुसूचित जातियों के उप-वर्गीकरण पर सुप्रीम कोर्ट की हाल की टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर कुशवाहा ने कहा,अनुसूचित जातियों में  क्रीमी लेयर की अवधारणा सही है। लेकिन ओबीसी में क्रीमी लेयर की अवधारणा सही नहीं है। उन्होंने जाति जनगणना का भी समर्थन किया और जिक्र किया कि भाजपा ने बिहार में इसका सर्वेक्षण गतिविधि का समर्थन किया था। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे इस मुद्दे को केंद्र सरकार के सामने उठाएंगे, तो उन्होंने कहा, अगर जरूरत पड़ी तो मैं इसे उठाऊंगा। 
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कुशवाहा ने कहा कि लोकसभा चुनाव में कम सीटों पर चुनाव लड़ने से उनकी पार्टी को नुकसान हुआ। लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव में यह गलती सुधार दी जाएगी।

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