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दिल्ली: धरना स्थलों से बैरिकेडिंग हटाने पर किसानों ने कहा- हमारी बात सही साबित हुई, पुलिस ने ही की थी घेराबंदी

Fri, 29 Oct 2021 09:29 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गाजीपुर में बैरिकेडिंग हटाए जाने को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने कहा है कि वह अपने रुख पर पहले की तरह बरकरार रहेंगे और गाजीपुर में किसानों का आंदोलन जारी रहेगा।
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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली पुलिस ने आज किसानों के धरना स्थल गाजीपुर और टिकरी बॉर्डर से कई स्थानों से बैरिकेडिंग हटा दिया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि पुलिस के इस कदम से उनकी यह बात सही साबित हुई है कि धरना स्थलों पर पुलिस ने ही रास्तों को बंद कर रखा था। अब सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के कारण बैरिकेडिंग हटाकर अपनी छवि बचाने की कोशिश की जा रही है। किसान मोर्चा ने यह भी कहा है कि लखीमपुर मामले में अधिकारियों का तबादला करके जांच को धीमा करने की कोशिश की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट को इस बात पर संज्ञान लेना चाहिए।

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गाजीपुर में बैरिकेडिंग हटाए जाने को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने कहा है कि वह अपने रुख पर पहले की तरह बरकरार रहेंगे और गाजीपुर में किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने कहा है कि बैरिकेडिंग को हटाए जाने के बाद यह अफवाह फैलाई जा रही है कि किसानों ने आंदोलन को समाप्त कर दिया। लेकिन वह स्पष्ट करना चाहते हैं कि किसानों का आंदोलन जारी है और भारी संख्या में किसान इस समय भी गाजीपुर बॉर्डर पर उपलब्ध हैं। उन्होंने अन्य किसानों से भी आग्रह किया है कि वे भारी से भारी संख्या में गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे और आंदोलन को मजबूत बनाएं। 

शुक्रवार को एक बयान जारी कर संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि किसानों ने धरना स्थलों पर रास्ते पर कोई पाबंदी नहीं लगाई थी। पुलिस ने स्वयं जानबूझकर धरना स्थलों को युद्ध के मैदान जैसा बना दिया था और जगह-जगह पर बैरिकेडिंग लगा दिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में मामले की बहस के बाद अब उन्हें अपनी छवि बचाने के लिए बैरिकेडिंग को हटाना पड़ रहा है। 
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संयुक्त मोर्चा ने कहा कि लखीमपुर मामले में अब तक जितने सबूत उपलब्ध हैं, उसके आधार पर केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा की बर्खास्तगी करना बिल्कुल सही कदम  होगा। उन्हें यह भी पता चला है कि मंत्री के बेटे को जेल में वीआईपी सुविधाएं दी जा रही है। किसानों ने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय को इस बात पर संज्ञान लेते हुए उचित निर्देश देना चाहिए। 

एनसीआरबी की रिपोर्ट में किसानों की आत्महत्याओं की वृद्धि पर संयुक्त किसान मोर्चा ने चिंता जाहिर की है। किसानों ने कहा है कि केंद्र सरकार का आंकड़ा स्वयं इस बात की गवाही देता है कि देश में किसानों की स्थिति खराब हो रही है। उनकी आर्थिक हालत बदतर हो चुकी है इसलिए किसानों के हित में यही है कि केंद्र सरकार अपने तीनों कृषि कानूनों को वापस ले और किसानों की स्थिति को बेहतर करने का प्रयास करें। 

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