दिल्ली हाईकोर्ट ने जासूसी कांड में दोषी करार दी गई पूर्व राजनयिक माधुरी गुप्ता को जमानत दे दी है। दोषी करार दिए जाने के खिलाफ माधुरी गुप्ता की अपील पर अगली सुनवाई सितंबर में होगी। अदालत ने माधुरी गुप्ता को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई को गोपनीय जानकारियां मुहैया कराने का दोषी पाया और तीन साल कैद की सजा सुनाई। अदालत ने माधुरी के इस तर्क को खारिज कर दिया कि महिला होने के नाते सहानुभूति बरती जाए। अदालत ने कहा कि उस पर गंभीर आरोप हैं और उसने देश की प्रतिष्ठा को काफी नुकसान पहुंचाया है। माधुरी गुप्ता पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग में प्रेस एवं सूचना सचिव थी। दिल्ली पुलिस ने उसे 2010 में गिरफ्तार किया था।
पटियाला हाउस अदालत स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सिद्घार्थ शर्मा ने बचाव पक्ष व सरकारी पक्ष को सुनने के बाद फैसले में कहा कि दोषी शिक्षित महिला है। यूपीएससी पास माधुरी विभिन्न देशों के दूतावास में कार्यरत रही हैं। इस घटना के समय वह पाकिस्तान के इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास में काफी संवेदनशील पद पर थीं। अदालत ने कहा कि ऐसे पद पर तैनात किसी भी व्यक्ति से अपेक्षा की जाती है कि वह आम नागरिक से ज्यादा जिम्मेदारी से काम करेगा। दोषी के कार्य से देश की प्रतिष्ठा को आघात लगा है। ऐसे में उनका मानना है कि वह किसी भी प्रकार से सहानुभूति की हकदार नहीं है।