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10 राज्यों की 14 सीटों पर उपचुनाव के बाद विपक्षी दलों का ऊंट किस करवट बैठेगा, जानिए 10 बातें

Thu, 31 May 2018 01:18 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नरेंद्र मोदी - फोटो : Getty Images
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देश के 10 राज्यों की 14 सीटों पर उपचुनाव के परिणाम देश में विपक्षी दलों के लिए लिटमस टेस्ट साबित होंगे। लोकसभा की 4 सीटों और विधानसभा की 10 सीटों पर उपचुनाव हुए हैं। कर्नाटक विधानसभा की एक सीट पर भी चुनाव हुआ है। कुल मिलाकर यह उपचुनाव एक तरह से पीएम मोदी के नेतृत्व को चुनौती देने के लिए विपक्षी दलों की तैयारी की एक तस्वीर हो सकते हैं। इस तस्वीर को हम यहां इन 10 बिंदुओं से समझने की कोशिश करेंगे।
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वर्तमान में भाजपा सांसदों की संख्या 272 है

congress - फोटो : amar ujala
2014 के लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा की कुल 282 सीट थी। वर्तमान में उसके सांसदों की संख्या 272 है। जो कि बहुमत की सीमा के नजदीक है। हालांकि लोकसभा के उप चुनाव के परिणाम केंद्र की मोदी सरकार को चुनौती तो नहीं दे सकते क्योंकि भाजपा को उसके सहयोगी दलों का समर्थन हासिल है। लेकिन यह चुनाव भाजपा की राजनीतिक साख को चुनौती जरूर दे सकते हैं। भाजपा 2014 से छह उपचुनाव हार चुकी है। विपक्ष को इस तरह के नुकसान का फायदा उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए।

भाजपा के पास 4 लोकसभा सीट में से 3 सीट थी

Loksabha Election 2019
भाजपा के पास 4 लोकसभा सीट में से 3 सीट थी। अगर वह एक भी सीट हारती है तो लोकसभा में उसका बहुमत कम हो जाएगा। साथ ही भाजपा पर एक मनोवैज्ञानिक दबाव भी आएगा। कर्नाटक के तुरंत बाद इस तरह की हार  विपक्षी दलों का ताकतवर बना सकती है।
 

गोरखपुर, फूलपुर की हार तो भाजपा की छवि को काफी नुकसान पहुंचाई थी

योगी आदित्यनाथ - फोटो : google
भाजपा पिछले चार सालों में 6 उप चुनाव हार चुकी है। गोरखपुर, फूलपुर की हार तो भाजपा की छवि को काफी नुकसान पहुंचाई थी। गोरखपुर तो मुख्यमंत्री आदित्यनाथ की लोकसभा सीट थी। वहां वह 5 बार के सांसद थे। आदित्यनाथ से पहले तीन बार उनके गुरू योगी अवैद्यनाथ वहां सांसद रहे।  

कैराना का परिणाम भाजपा को करारा झटका दे सकता है

प्रतीकात्मक फोटो
कैराना का परिणाम भाजपा को करारा झटका दे सकता है। आरएलडी प्रत्याशी तबस्सुम हसन को यहां कांग्रेस, सपा और बसपा का समर्थन हासिल है। इस तरह की जीत भाजपा के लिए यूपी में एक तरह से नए विरोधी गठबंधन की शुरुआत हो सकती है। यूपी के नूरपुर विधानसभा में भी भाजपा पीछे है। यहां से सपा के नैमुल हसन को कैराना के गठबंधन के बदले यहां बसपा और रालोद का समर्थन हासिल है। यह समीकरण यूपी की सियासत को नई दिशा दे सकता है।

इसके परिणाम 2019 के लिए नई तस्वीर हो सकते हैं

ये उपचुनाव भाजपा और मुख्य विपक्षी दलों के लिए पूरे देश में एक तरह से टकराहट की स्थिति पैदा कर रहे हैं। इसके परिणाम 2019 के लिए नई तस्वीर हो सकते हैं। भाजपा के लिए यह सभी दल एक नई चुनौती साबित हो सकते हैं। सपा और बसपा की करीबी भाजपा का सिरदर्द बढ़ा सकती है।

ऐसा समीकरण समूचे देश के लिए भी हो सकता है

कर्नाटक
कर्नाटक में सपा और बसपा के गठबंधन को जनता दल एस का सहयोग है। ऐसा समीकरण समूचे देश के लिए भी हो सकता है। यह भी भाजपा को टक्कर दे सकता है।

शिवसेना के साथ भाजपा के संबंधों में तल्खी हमेशा बनी रहती है

Shivsena
महाराष्ट्र के पालघर और भंडारा-गोंदिया का परिणाम भाजपा के लिए राहत साबित हो सकता है। लेकिन यहां शिवसेना के साथ भाजपा के संबंधों में तल्खी हमेशा बनी रहती है।

जनता दल यू का भाजपा के साथ गठबंधन है

लालू यादव
बिहार की जोकीहाट विधानसभा में जनता दल यू और राजद के बीच सीधा मुकाबला है। जनता दल यू का भाजपा के साथ गठबंधन है। गत मार्च में बिहार की अररिया लोकसभा सीट राजद ने भाजपा से छीन ली थी। जनता दल यू के महागठबंधन के टूटने के बाद यह राजद के लिए एक बड़ी जीत थी। अगर राजद को उप चुनाव में जीत मिली तो यह 2019 के लिए बिहार में लालू प्रसाद यादव के लिए एक बड़ी संजीवनी साबित हो सकता है।
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कर्नाटक में भी है चुनौती

कर्नाटक के आरआर नगर सीट का चुनाव भी विपक्ष को एक तगड़ा सहयोग दे सकता है। राज्य में कांग्रेस और जदएस भले ही मिलकर गठबंधन सरकार चला रहे हो पर यहां उन्होंने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं। भाजपा को यहां इन दोनों से कड़ी टक्कर मिल सकती है। 
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