सीबीआई ने मामले में डीआरआई अफसर चंद्रशेखर और कारोबारी ढांडा को एक जनवरी को गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने तीसरे व्यक्ति क्लियरिंग हाउस एजेंट अनूप जोशी को भी गिरफ्तार किया था। निचली अदालत ने बाद में 16 जनवरी को ढांडा को जमानत दे दी थी।
सीबीआई के अनुसार, जून 2019 में डीआरआई ने निर्यातकों को सेवा मुहैया कराने वाली निजी क्लियरिंग एजेंसी पर छापे मारे थे। इस दौरान एक निर्यातक से जुड़े कुछ दस्तावेज जब्त किए गए थे। एजेंसी को मिली शिकायत के अनुसार, चंद्रशेखर के करीबी दोस्त जोशी और ढांडा ने डीआरआई अफसर की ओर से तीन करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी।
तय यह हुआ कि इसके बदले डीआरआई बरामद दस्तावेजों को लेकर मुकदमा नहीं करेगी। सीबीआई ने बयान में कहा था कि उसने पहली किश्त के रूप में कथित तौर पर 25 लाख रुपये की घूस लेते समय जोशी और ढांडा को गिरफ्तार किया था।