पर्यावरण के प्रति चिंता जताते हुए देश की शीर्ष अदालत ने दिल्ली सरकार पर बड़ी टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार ने पर्यावरण को बचाने में संवेदनशीलता नहीं दिखाई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार को 442 पेड़ों के कटाई की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। क्योंकि दिल्ली सरकार ने साउर्थन रिज रिजर्व फॉरेस्ट इलाके के 442 पेड़ों को काटने की अनुमति दिल्ली विकास प्राधिकरण को दी। जबकि दिल्ली सरकार के पास ऐसी अनुमति देने के लिए कोई शक्ति नहीं है। बता दें कि इन पेड़ों को काटने की अनुमति सड़क बनाने के लिए दी गई थी।
राजधानी में पेड़ों की कटाई पर SC ने खुद लिया संज्ञान
मामले में न्यायमूर्ति अभय एस ओका और उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि यह एक स्वीकार्य स्थिति है, जैसा कि अधिकारी की तरफ से दिए गए बयान से पता चलता है कि 422 पेड़ों को काटने के लिए अधिकारी ने कोई अनुमति नहीं दी थी। बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए रिज वन में 1,100 पेड़ों को कथित रूप से काटने के मामले में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के उपाध्यक्ष के खिलाफ खुद संज्ञान लेने के बाद से अवमानना कार्यवाही की सुनवाई कर रहा था।
'दिल्ली सरकार को 442 पेड़ों के कटाई की जिम्मेदारी लेनी चाहिए'
पीठ ने 12 जुलाई को दिए आदेश में कहा कि, दिल्ली सरकार को 422 पेड़ों को गिराने की अनुमति देने का दोष स्वीकार करना चाहिए, हालांकि दिल्ली सरकार को ऐसी अनुमति देने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। पीठ ने आगे कहा, इस प्रकार, रिज क्षेत्र के पेड़ों के अलावा, सरकार ने दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1994 के तहत अनुमति के बिना रिज क्षेत्र के बाहर के पेड़ों को काटने और गिराने में भी मदद की।
'सरकार ने पर्यावरण सुरक्षा में दिखाई असंवेदनशीलता'
शीर्ष अदालत ने कहा कि डीडीए की तरह, दिल्ली सरकार ने पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर संवेदनशीलता की कमी दिखाई है। पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार ने वृक्ष अधिकारी और वृक्ष प्राधिकरण को कार्यालय या बुनियादी ढांचा भी उपलब्ध नहीं कराया है। पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार को अदालत के सामने आना चाहिए और बताना चाहिए कि वह अपने अवैध कृत्यों के कारण पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई कैसे करेगी।
'पेड़ों को काटने की अनुमति देने का ये पहला मामला नहीं'
दिल्ली सरकार के हलफनामे से यह भी पता चलता है कि यह एकमात्र ऐसा मामला नहीं है, जहां दिल्ली सरकार के वन विभाग ने पेड़ों को काटने की अनुमति देने का दावा किया है। उन्होंने पहले भी ऐसा किया है। पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार का रुख यह है कि डीडीए ने स्वीकार किया है कि उन्होंने दिल्ली सरकार द्वारा जारी अधिसूचनाओं को गलत पढ़ा था। इससे दिल्ली सरकार पेड़ों की कटाई की अनुमति देने वाले आदेश पारित करने की अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा पिछले पांच साल का ब्यौरा
शीर्ष अदालत ने कहा कि दिल्ली सरकार को उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई रिपोर्ट, यदि कोई हो, पेश करनी चाहिए, जिन पर पेड़ों की कटाई की अनुमति देने का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि कि पिछले पांच वर्षों में दिल्ली सरकार ने कितनी ऐसी अनुमतियां दी हैं और उन सभी अनुमतियों को पेश करें। वहीं दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सोंधी ने न्यायालय को आश्वासन दिया कि कार्यालय का बुनियादी ढांचा, कर्मचारी और आवश्यक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर छह सप्ताह के भीतर वृक्ष प्राधिकरण और वृक्ष अधिकारी को उपलब्ध करा दिए जाएंगे।