दिल्ली में संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने 14 निजी अस्पतालों को कोविड विशेष घोषित किया। जबकि 19 निजी अस्पतालों में 80 फीसदी और 82 अस्पतालों में 60 फीसदी आईसीयू बेड कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित किए। इस समय कुल 12692 बेड हैं। इनमे से 7778 भरे हुए हैं। जबकि पांच हजार से ज्यादा बेड अभी भी सरकारी अस्पताल में कोविड के मरीजों के लिए खाली हैं।
सिर्फ सरकारी अस्पतालों में ही नहीं बल्कि दिल्ली सरकार ने जो कोविड केयर केंद्र बनाए हैं वहां भी 90 फीसदी बेड मरीजों के लिए खाली है। दिल्ली के कोविड केयर केंद्रों में इस वक़्त 5500 बेड हैं। जबकि इन केंद्रों में महज 310 मरीज ही दाखिल हैं।
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन कहते हैं कि उनकी सरकार ने पिछले सप्ताह पांच हजार बेड बढ़ाए हैं। 50 फीसदी बेड अभी भी मरीजों के लिए उपलब्ध हैं। जबकि सरकार कोविड मरीजों के लिए और बेड बढ़ाने की तैयारी कर रही है। दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार से भी उसके अस्पतालों में बेड बढ़ाने के लिए संपर्क किया है। स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन कहते हैं कि उनकी सरकार दिल्ली में और भी कई कोविड केयर केंद्र बनाने की तैयारी कर रही है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के महाराष्ट्र चैप्टर के डॉक्टर छगन भाऊराव देशमुख कहते हैं कि महाराष्ट्र के सरकारी अस्पतालों में बेहतर कोविड मैनेजमेंट नहीं दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि यहां के अस्पतालों तक पहुंचने से पहले ही मरीज दम तोड़ रहे हैं। डॉ. देशमुख का कहना है सरकार को बेहतर मैनेजमेंट अस्पतालों में करना चाहिए ताकि मरीजों को इलाज मिल सके और उनको बचाया जा सके।
उत्तर प्रदेश के प्रांतीय चिकित्सा संवर्ग के डॉक्टर अशोक यादव कहते हैं सरकार का मैनेजमेंट इतना फेल है कि वह अस्पताल होने के बाद भी मरीजों को बेड मुहैया नहीं करा पा रहे हैं। डॉक्टर यादव का आरोप है कि सरकार कोरोना के मरीजों के इलाज में पूरी तरीके से फेल हो चुकी है। सरकार के मैनेजमेंट का असर मध्यप्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में भी दिख रहा है। इन राज्यों में भी मरीजों को वक्त पर अस्पताल में इलाज नहीं मिल पाता है जबकि इन राज्यों में अस्पतालों की संख्या और बेड की संख्या अच्छी खासी है।