बर्थ सर्टिफिकेट- डेथ सर्टिफिकेट
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जहां एक ओर देश में महिला सशक्तिकरण की बात होती, देश में जहां बेटी बढ़ाओ बेटी पढ़ाओ का नरा सरकार के भोपू से गुंजता रहता है। वही गुजरात में 2.5 साल की बेटी को पढ़ाने की तैयारी कर रहे परिवार को प्रशासन ने बेटी के बर्थ सर्टिफिकेट के बजाय डेथ सर्टिफिकेट दे दिया यह मामला गुजरात के वडोदरा के राभीपुरा ग्राम पंचायत का है।
लड़की के पिता मिथिलभाई पटेल ने बताया कि मैनें अपनी बेटी शक्ति का स्कूल में दाखिला करवाने गया था , जिसके बाद स्कूल की ओर से अंग्रेजी में बर्थ सर्टिफिकेट बनवाने को कहा गया। मैंने बर्थ सर्टिफिकेट के लिए एक सप्ताह पहले ही अर्जी लगाई थी। जिसके बाद 20 दिसंबर को जब मेरे घर प्रमाण पत्र पहुंचा तो पता चला कि जिला प्रशासन ने जन्म की बजाय मृत्यु प्रमाण पत्र बनाकर भेज दिया है। जिसके कारण स्थानीय निकाय के रिकॉर्ड में इस प्रमाण पत्र के कारण मेरी बेटी को मृत बना दिया है।
मिथिलभाई ने अपने क्षेत्र के पटवारी पर आरोप लगाया कि इस बात की शिकायत मैंने जब वडोदरा तहसील स्तर के अधिकारी को किया, जिसके बाद उच्च अधिकारियों ने उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के बजाय पटवारी को बचाने का प्रयास किया। किसी और के साथ ऐसा न हो इसलिए मैं इस बात को मीडिया के सामने लेकर आया हूं और मुझे अब तक मेरा बेटी का अंग्रेजी में जन्म प्रमाण पत्र भी नहीं मिला है।
वही इस मामले पर राभीपुरा ग्राम पंचायत के पटवारी नरेश पटेल ने कहा कि मेरी भूल के कारण मुझसे मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हो गया है। इस संबध में मिथिलभाई से मेरी बात हो चुकी है, एक दो दिन में उन्हे उनकी बेटी का नया प्रमाण पत्र दे दिया जाएगा। मैं अपनी भूल स्वीकार का करता हूं, मेरी इस भूल के असमंजस की स्थिति का निर्माण हुआ।