केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में शुक्रवार को सरकार ने निर्यातकों के लिए कर और शुल्क वापसी की योजना को भी मंजूरी दी है। निर्यात में आ रही गिरावट को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने ट्विटर के माध्यम से बताया कि बिजली दरों पर शुल्क, परिवहन क्षेत्र, कृषि क्षेत्र, निजी उपयोग के लिये बिजली उत्पादन में ईंधन पर मूल्य वर्धित कर (वैट), मंडी कर, स्टांप शुल्क और परिवहन में उपयोग होने वाले ईंधन पर भुगतान किए गए केंद्रीय उत्पाद शुल्क की भरपाई से घरेलू उत्पादों को वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी।
साथ ही यह भी कहा गया कि ये उपाय विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) नियमों के अनुरूप हैं। मंत्रालय ने कहा कि निर्यात उत्पादों पर कर और शुल्कों से राहत (आरओडीटीईपी) को चरणबद्ध तरीके से अधिसूचित किया जाएगा और उन क्षेत्रों एवं उत्पादों में एमईआईएस (भारत की वस्तु निर्यात योजना) के तहत मिल रहे लाभ को वापस लिया जाएगा। बता दें कि वित्त मंत्री ने एक फरवरी को पेश बजट में आरओडीटीईपी योजना की घोषणा की थी।
इस बारे में जानकारी देते हुए वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इस नई योजना के क्रियान्वयन के साथ वस्तु निर्यात प्रोत्साहन योजना (एमईआईएस) को वापस लिया जाएगा। इसका मकसद निर्यातकों को प्रोत्साहित करना है। इससे सरकारी खजाने पर 50,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।
विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुसार बिजली, तेल, पानी पर कर और शिक्षा उपकर जैसे शुल्कों को वापस करने की अनुमति है। विश्व व्यापार संगठन की विवाद समाधान समिति ने एमईआईएस योजना को वैश्विक व्यापार नियमों के अनुरूप नहीं बताया था।
देश का निर्यात जनवरी में 1.66 प्रतिशत घटकर 25.97 अरब डॉलर रहा। यह लगातर छठा महीना है जब निर्यात कम हुआ है। चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-जनवरी के दौरान निर्यात 1.93 प्रतिशत घटकर 265.26 अरब डॉलर रहा जबकि आयात 8.12 प्रतिशत घटकर 398.53 अरब डॉलर रहा। इससे व्यापार घाटा 133.27 अरब डॉलर रहा।
संकट में फंसे यस बैंक में आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, कोटक और एक्सिस बैंक कुल 3,100 करोड़ रुपये का निवेश करेंगे। चारों निजी बैंकों ने शुक्रवार को यह एलान करते हुए कहा कि यस बैंक की हिस्सेदारी खरीदकर यह निवेश किया जाएगा।
आईसीआईसीआई बैंक ने कहा कि उसके बोर्ड ने यस बैंक में 1,000 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दे दी है। यह निवेश 10 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से किया जाएगा। इस प्रकार आईसीआईसीआई बैंक, यस बैंक 100 करोड़ शेयर खरीदेगी। बैंक ने एक नियामकीय फाइलिंग में कहा, ‘इस निवेश के क्रम में यस बैंक में आईसीआईसीआई बैंक हिस्सेदारी 5 फीसदी से ज्यादा हो जाएगी।’
उधर, गिरवी ऋणदाता कंपनी एचडीएफसी भी पुनर्गठन योजना के तहत यस बैंक में 1,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इसके अलावा कोटक महिंद्रा बैंक ने 500 करोड़ रुपये और एक्सिस बैंक ने 600 करोड़ रुपये के निवेश का एलान किया है। सभी निजी बैंकों के निवेश पर तीन सील की लॉक-इन अवधि लागू होगी।