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खतरनाक: कोरोना पॉजिटिव निकला दो दिन का नवजात, संक्रमित बच्चों की संख्या में हो रही वृद्धि

Fri, 23 Apr 2021 03:49 PM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धुलिया

सार

हाल ही में संक्रमण का एक मामला महाराष्ट्र के धुलिया जिले से सामने आया है, जहां केवल दो दिन का नवजात शिशु कोरोना से संक्रमित पाया गया। वह अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है।
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कोरोना पॉजिटिव नवजात शिशु - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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देशभर में व्याप्त कोरोना महामारी की दूसरी लहर के कारण हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। दूसरी लहर में वायरस के नए वैरिएंट B.1.1.7 और B.1.617 बच्चों के लिए खतरनाक साबित हुए हैं। यह नए स्ट्रेन छोटे बच्चों में काफी तेजी से फैल रहे हैं। हाल ही में संक्रमण का एक मामला महाराष्ट्र के धुलिया जिले से सामने आया है, जहां केवल दो दिन का नवजात शिशु कोरोना से संक्रमित पाया गया। वह अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है।

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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिनव दरवडे ने जानकारी दी है कि बच्चा गर्भ में कोरोना से संक्रमित हो गया। उसका इलाज शहर के नर्सिंग चिल्ड्रेन अस्पताल में जारी है। उसमें रक्त के थक्के बनने के साथ कई अन्य बीमारियां हैं। यह बच्चा कोविड के मल्टी-सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम से जूझ रहा था, जिसका इलाज किया गया है। शिशु में कोरोना के जो लक्षणों सामने आए हैं उनमें झुनझुनी, सांस लेने में तकलीफ और झटके आना शामिल हैं।

80 हजार बच्चे कोरोना से संक्रमित
इधर, गुजरात के सूरत में एक 14 दिन की बच्ची की कोरोना वायरस की चपेट में आने से जान चली गई। स्वास्थ्य विभाग के डाटा के अनुसार इस साल एक मार्च से चार अप्रैल के बीच महामारी की दूसरी लहर के दौरान 80 हजार बच्चे कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और दिल्ली में अब तक कुल 79 हजार 688 बच्चे कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए। इन बच्चों में तेज बुखार और निमोनिया जैसे गंभीर लक्षण देखे जा रहे हैं, जिसकी वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है। 
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दूसरी लहर ज्यादा खतरनाक
कोरोना की दूसरी लहर पहली से खतरनाक मानी जा रही है। पहली लहर ना तो बच्चों के लिए खतरनाक थी और ना ही उनमें संक्रमण के गंभीर लक्षण मिले थे। हालांकि, इस बार हालात बदल चुके हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वयस्कों की तुलना में कोरोना से संक्रमित बच्चों के इलाज में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों के लिए कोरोना से बचाव के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।

उन्होंने कहा कि कोरोना से संक्रमित बच्चों के लिए कोई अलग वॉर्ड भी नहीं है क्योंकि पिछले साल बच्चों के इतने मामले सामने नहीं आए थे जितने कि अब आ रहे हैं। शिशुओं में कोरोना के लक्षण दिखने से ये साफ पता चलता है कि वायरस का म्यूटेशन हो चुका है। कुछ गंभीर मामलों में बच्चों की मौत तक हो जा रही है। डॉक्टरों ने बताया कि बच्चों में कोरोना की स्थिति गंभीर होने पर मल्टी-इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम की समस्या देखने को मिल रही है, जिसके कारण उनकी जान जा रही है।

क्या हैं लक्षण
बुखार, सिर दर्द, कफ और कोल्ड जैसे कोरोना के आम लक्षणों के अलावा स्किन रैशेज, कोविड टोज, लाल आंखें, शरीर और जोड़ों का दर्द, मिचली, पेट में ऐंठन, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संबंधी दिक्कतें, फटे होंठ, थकान और सुस्ती जैसे लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज ना करें। छोटे बच्चों और नवजात में स्किन के रंग का बदलना, बहुत ज्यादा बुखार, भूख ना लगना, उल्टी, मांसपेशियों में दर्द, होठों व त्वचा में सूजन और मुंह में छाले जैसे लक्षण हो सकते हैं। 

जरूरी सावधानियां
बच्चों को भी मास्क पहनाएं। साफ-सफाई का ध्यान रखें। घर से बाहर बिल्कुल भी ना भेजें। घर में अगर किसी सदस्य को कोरोना संक्रमण हो गया है तो बच्चों को उनसे दूर रखें। नवजात या बच्चों में कोरोना से जुड़े लक्षण दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

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