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Cyber Crime: रोज हजारों लोगों को लूट रहे साइबर जालसाज, कानून और तकनीक के अभाव ने बांधे सरकार के हाथ

सार

एक रिपोर्ट के अनुसार साइबर अपराधियों ने 2023 में दुनिया भर से छह खरब डालर लूट लिए थे। अनुमान है कि 2024 में यह आंकड़ा 8 खरब अमेरिकी डालर को पार कर जाएगा।
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तेजी से बढ़ रहे साइबर ठगी के मामले - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एक रिपोर्ट के अनुसार साइबर अपराधियों ने 2023 में दुनिया भर से छह खरब डालर लूट लिए थे। अनुमान है कि 2024 में यह आंकड़ा 8 खरब अमेरिकी डालर को पार कर जाएगा। इसमें एक बड़ा हिस्सा लूटे गए भारतीयों का भी होगा। साइबर सुरक्षा मामलों के उच्चतम न्यायालय के वकील पवन दुग्गल कहते हैं कि हमारे तो हाथ बंधे हैं। न देश के पास कोई प्रभावी कानून है और न ही साइबर अपराधों को रोकने और इससे निपटने की प्रभावी तकनीक। थेल्स कंपनी के साइबर सुरक्षा विंग को सेवाएं दे रहे पवन कुमार कहते हैं कि स्थिति बहुत विकट है।

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थेल्स प्रोफेशनल का कहना है कि साइबर सुरक्षा की चिंता के घेरे में देश में कश्मीर से कन्याकुमारी तक के गांव, कस्बे, शहर हैं। बताते हैं कोविड-19 के बाद यह खतरा कई गुना बढ़ गया है। अब तो आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) की भी एंट्री हो गई है। लार्सन टुब्रो की सिस्टर आईटी कंपनी माइंड ट्री के सीनियर अधिकारी राजेश चौधरी कहते हैं कि अभी तो मान लीजिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस ने साइबर अपराध के साथ खेलना शुरू किया है। अभी तो इसका उछल-कूद मचाना बाकी है। राजेश चौधरी भी उन लोगों में से हैं जिनकी पत्नी को भी कभी साइबर ठगों ने ठग लिया था। वह कहते हैं कि देश का पढ़ा, लिखा, अंग्रेजी और हिंदी जानने वाला भी साइबर ठगों के जाल में बहुत तेजी से आ रहा है।

न सरकार के पास राजनीतिक इच्छा शक्ति और न ही कोई मैकेनिज्म
पवन दुग्गल कहते हैं कि देश की जनता साइबर लूट को सहने के लिए अभिशप्त है, क्योंकि सरकार के पास राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी है। जो भी फोन कॉल, वीडियो कॉल आते हैं, सब नेटवर्क प्रोवाइडर के जरिये ही आ रहे हैं। लेकिन सरकार ने अभी तक किसी सर्विस प्रोवाइडर या एजेंसी की इसके बाबत नकेल कसने के उपाय नहीं किए हैं। दुग्गल के मुताबिक 2013 में भारत सरकार ने एक कानून बनाया था, लेकिन तकनीक और अपराध के तिलिस्म में यह पूरी तरह से निष्प्रभावी है। दुग्गल कहते हैं कि अखबारों में तमाम साइबर अपराध की खबरें आ रही हैं। लेकिन केंद्र सरकार कान में तेल डालकर बैठी है। इसके कारण साइबर अपराध पूरे देश में कॉटेज इंडस्ट्री बनता जा रहा है।
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कैसे कैसे चल रहे हैं साइबर ठगी के हथकंडे....
पवन दुग्गल को फोन आया। फोन से पूरा आभास था कि यह ट्राई(टेलीफोन रेगुलेटरी अथारिटी आफ इंडिया) की तरफ से है। इसमें साफ कहा गया कि फोन के दुरुपयोग, पोर्नोग्राफी और लोगों को गाली देने का कारण दो घंटे बाद आपका फोन बंद हो जाएगा। इसके बाद निर्देश आने लगते हैं कि इस मामले को जानने के लिए एक दबाइए। एक्जीक्यूटिव से बात करने के लिए दो दबाइए और फिर पैसा उगाही शुरू हो जाती है।

संवाददाता के पास भी ऐसा ही एक फोन आया कि उसके पास तीस हजारी की अदालत गैर जमानती वारंट जारी हुआ है। वारंट और विवरण जानने के लिए फलां बटन दबाइए। ओम प्रकाश एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं। उनके पास फोन आया और व्हाट्सअप फोन नंबर देने का अनुरोध किया गया। इसके बाद ठगों ने ओम प्रकाश को एक युवती के साथ बात कराकर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।

सबसे दिलचस्प वाकया सुनील कुमार से हुआ। सुनील कुमार बंगलूरू से अपने घर आए थे। अचानक उनके फोन पर सूचना आई कि बंगलूरू एयरपोर्ट पर चेक इन के दौरान उनके सामान से एक पैकेट गिर गया था। इसमें सुरक्षा अधिकारी को ड्रग्स मिला था। सुनील कुमार थोड़े ही समय में साइबर ठगों के जाल में फंस गए। इसके बाद उन्हें ब्लैकमैल करके धन की उगाही शुरू हो गई।

दिल्ली में पुलिस डाल डाल तो चोर पात-पात, कैसे लगेगी लगाम?
दिल्ली पुलिस मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारी हैं। साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में जिम्मेदारी संभालते हैं। लेकिन स्वीकार कर रहे हैं कि पुलिस को जिस स्तर साइबर सुरक्षा का प्रशिक्षण मिलना चाहिए वह नहीं है। एक पुलिस स्टेशन के एसएचओ कहते हैं कि उन्हें सीसीटीवी खंगालने के लिए निजी आईटी एक्सपर्ट की मदद लेनी पड़ती है। एनआईसी को अपनी सेवाएं दे रहे सूत्र का कहना है कि आप साइबर सुरक्षा की बात कर रहे हैं। जबकि देश में एकाध प्रतिशत ही लोग हैं जिन्हें अपने मोबाइल को ठीक से ऑपरेट करने का ज्ञान होगा। इंटरनेट के प्रयोग में भी लोग गड़बड़ियां करते हैं।

सूत्र का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियों और अर्ध सैनिक बलों की स्थिति भी काफी चिंतनीय है। खुफिया और सुरक्षा एजेंसी से जुड़े सूत्र का कहना है कि सरकार को इस दिशा में ठोस उपाय करने की आवश्यकता है। सूत्र का कहना है कि साइबर ठगों, सेंधमारों और हैकरों का जाल लगातार जटिल होता जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि जो आप नहीं चाहते, वह आपका मोबाइल, कंप्यूटर या इंटरनेट का माध्यम किसी न किसी माध्यम से क्यों आपकी स्क्रीन पर लेकर आता है? सूत्र का कहना है कि आज सबसे बड़ी समस्या डाटा की सुरक्षा ही है।
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