सीआरपीएफ ने 84वें स्थापना दिवस पर अधिकारियों और जवानों की वीरता का सम्मान किया है। वसंत कुंज स्थित शौर्य सीआरपीएफ अधिकारी प्रशिक्षण संस्थान में बुधवार को आयोजित अलंकरण समारोह में 107 अधिकारियों एवं जवानों को वीरता पदक प्रदान किए गए। इनमें से कई जांबाज ऐसे थे, जिन्होंने खुद घायल होने के बावजूद आतंकियों को ठिकाने लगा दिया। कुछ ऐसे जवान भी रहे, जिन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए देश के लिए अपनी शहादत दे दी। इन शहीदों का वीरता पदक उनकी पत्नियों यानी वीर नारियों ने ग्रहण किया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ट्वीट के जरिए सीआरपीएफ को शुभकामनाएं दी। उन्होंने लिखा, सीआरपीएफ के सभी कर्मियों और उनके परिवारों को स्थापना दिवस की बधाई। इस फोर्स ने अपने अदम्य साहस और विशिष्ट सेवा के जरिए खुद को प्रतिष्ठित किया है। सुरक्षा चुनौतियों या मानवीय चुनौतियों से निपटने में सीआरपीएफ की सराहनीय भूमिका रही है। डीजी कुलदीप सिंह ने अधिकारियों और जवानों को वीरता पदक प्रदान किए।
23 जून 2020 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में आतंकवादियों की उपस्थिति की सूचना मिलने पर 182वीं बटालियन सीआरपीएफ ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर एक संयुक्त घेराबंदी एवं तलाशी अभियान चलाया। अभियान के दौरान अचानक एक आतंकवादी ने भीषण गोलीबारी शुरू कर दी। तभी दल में सबसे आगे चल रहे हवलदार काले सुनील दत्तात्रेय ने अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा की बिल्कुल परवाह किए बिना, आमने-सामने की लड़ाई में उस आतंकवादी को मार गिराया। छिपे बैठे एक अन्य आतंकवादी ने हवलदार काले सुनील दत्तात्रेय पर हमला कर दिया। इस हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने आतंकवादी पर जवाबी हमला जारी रखा। इसी दौरान त्वरित कार्रवाई करते हुए निरीक्षक जमाल अहमद, हवलदार रघुनंदन सिंह एवं सिपाही गुलशन सिंह ने उस आतंकवादी को मार गिराया। इस अभियान में आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के दो खूंखार आतंकियों को मार गिराया गया। हवलदार काले सुनील दत्तात्रेय ने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी धर्मपत्नी वीर नारी अर्चना सुनील काले ने वीरता पदक ग्रहण किया। निरीक्षक जमाल अहमद, हवलदार रघुनंदन सिंह और सिपाही गुलशन सिंह को भी वीरता पदक से नवाजा गया।
12 जून 2019 को जम्मू-कश्मीर में 116 बटालियन सीआरपीएफ की टुकड़ी विधि व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए बस स्टैंड अनंतनाग में तैनात थी। तभी स्थानीय नागरिकों की भीड़ का सहारा लेकर एक आतंकवादी ने सीआरपीएफ की टुकड़ी पर ग्रेनेड हमला कर गोलीबारी शुरू कर दी। वहां तैनात सहायक उपनिरीक्षक निरोद शर्मा ने गोलियों की बौछार के बीच हमलावर आतंकवादी पर जवाबी हमला किया। गुथम गुत्था की लड़ाई में उन्होंने उस आतंकवादी को मार गिराया। हालांकि वे खुद गंभीर रूप से घायल हो गए। इनके द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई ने एक भीड़भाड़ वाले इलाके में हुए भीषण गोलीबारी में स्थानीय नागरिकों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होने दिया। इनके द्वारा प्रदर्शित अतुलनीय पराक्रम, असाधारण वीरता एवं सर्वोच्च बलिदान के लिए इन्हें मरणोपरांत वीरता के पुलिस पदक से सम्मानित किया गया है। शहीद एसआई निरोद शर्मा की धर्मपत्नी वीर नारी जोनाली देवी ने पदक ग्रहण किया।